मातहतों को पीटने के आरोपी आईपीएस राजेश मोदक को राज्य सरकार ने वाराणसी के एसएसपी जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया है।
यहां तैनात रहे अजय मिश्र को आईजी जोन व मातहत अधिकारियों के साथ नाइत्तिफाकी का खामियाजा उठाना पड़ा है। उन्हें लखनऊ में एंटी करप्शन विभाग में एसपी बनाया गया है।
सरकार ने इसके साथ ही दो और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल किया है।
सहारनपुर के एसएसपी डीएस चौधरी को यातायात पुलिस विभाग में उप निदेशक तथा सीबी-सीआईडी लखनऊ में तैनात रहे उपेंद्र अग्रवाल को सहारनपुर का एसएसपी बनाया गया है।
पिछले दिनों राजेश मोदक पर मुरादाबाद का एसएसपी रहने के दौरान मातहतों से मारपीट का आरोप लगा था।
इस पर उन्हें निलंबित कर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था और उनके खिलाफ जांच की बात कही गई थी।
हालांकि कई दिनों तक उनके खिलाफ कोई जांच नहीं की गई और सरकार ने चुपचाप उन्हें बहाल भी कर दिया।
इस पर जब सवाल उठे तो जिम्मेदार अधिकारियों ने बयान दिया कि मोदक के खिलाफ प्रारंभिक जांच हुई थी और अब विभागीय जांच के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है।
शासन इस पर विचार कर जांच अधिकारी तैनात करेगा, जबकि बुधवार तक मोदक को उनके खिलाफ जांच करने के लिए आरोप पत्र नहीं दिया गया था।
बगैर आरोप पत्र दिए जांच कैसे हो सकती है, इस सवाल पर सरकार का पक्ष रखते हुए विशेष सचिव गृह अरुण मिश्र ने कहा कि आरोप पत्र तैयार हो रहा है। अभी सरकार ने इस प्रकरण में जांच अधिकारी नहीं तैनात किया है।
उधर, वाराणसी के एसएसपी अजय मिश्र की वाराणसी जोन के आईजी जीएल मीना के साथ नाइत्तिफाकी की पहले से ही चर्चा थी। इसे लेकर ऊपर तक शिकायत पहुंच चुकी थी।
पिछले दिनों वाराणसी के अपर पुलिस अधीक्षक यातायात के साथ हुई उनकी अनबन भी चर्चा में आ गई थी। इसे लेकर मिश्र के तबादले के कयास लगाए जा रहे थे।
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