फिल्म अभिनेता राजीव खंडेलवाल के खाते में फिल्मों की संख्या कम है, लेकिन उनकी फिल्में कुछ हटकर होती है। ‘आमिर’, शैतान, ‘साउंडट्रैक’, ‘टेबिल नंबर 21’ जैसी फिल्मों का अपना प्रशंसक वर्ग है। फिल्मों के पहले और फिल्मों के साथ भी उन्होंने टेलीविजन पर लंबी पारी खेली है।
बाद के कार्यक्रमों में उन्हें ‘सच का सामना’ के प्रस्तोता के रूप में याद किया जाता है। खंडेलवाल की इस माह ‘फीवर’ प्रदर्शित होने वाली है, जो एक अलग ढंग की कहानी है। वे लखनऊ में इन दिनों ‘प्रणाम’ की शूटिंग भी कर रहे हैं। शूटिंग के दौरान उन्होंने ‘अमर उजाला’ से लंबी बातचीत की...
‘फीवर’ किस तरह की फिल्म है?
- यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसकी याद्दाश्त चली जाती है और उसे सिर्फ यह याद रहता है कि उससे पहले कोई गुनाह हो चुका है। वह इस डर में जीवन व्यतीत करता है, जिसका तनाव उसके साथ है।
फिल्म के अंशों के पूर्वावलोकन से लगता है कि इसमें आपकी भूमिका नायक और खलनायक दोनों ही तरह के प्रभाव लिए हुए है?
- हां, इसमें कई तरह शेड्स हैं लेकिन मैं फिल्म की कहानी के बारे में अभी कुछ नहीं बता सकता हूं। यह मेरे लिए एक अलग तरह की भूमिका है। मैंने इस तरह की भूमिका पहले कभी नहीं की है। यह नहीं कहूंगा कि यह एक आसान भूमिका थी।
यह काफी बोल्ड फिल्म भी लगती है। क्या आपको इसे लेकर कोई हिचकिचाहट भी थी?
- यह फिल्म जैसी बनी है, वैसी ही मुझे सुनाई गई थी। स्विट्जरलैंड की कहानी है तो वहां का माहौल दिखाया जाना तो जरूरी है, लेकिन इसमें जो खुलापन है वह कहानी कहने का एक अंदाज है।
आप कम फिल्में करते हैं, लेकिन आपकी फिल्में पूरी तरह आपके दम पर होती है। उसमें कोई बहुत लोकप्रिय कलाकार शामिल नहीं होता है। इसके पीछे जो आपका आत्मविश्वास है, उसका आधार क्या है?
- मेरी फिल्मों में मुझसे बड़ा हीरो फिल्म की स्क्रिप्ट होती है। मैं सिर्फ उस पटकथा का हिस्सा होता हूं। उसमें हीरो स्क्रिप्ट होती है। बाकी जिन लोकप्रिय कलाकारों की बात आप कर रहे हैं, उसमें हीरो तो वे ही होते हैं, स्क्रिप्ट प्राय: होती ही नहीं है। मुझे मालूम है कि मैं इतना काबिल नहीं हूं कि आप मुझे कुछ भी दे दें और मैं फिल्म कर ले जाऊं। मैं एक अच्छी स्क्रिप्ट ढूंढता हूं और मैं चाहता हूं कि लोग मुझे नहीं, फिल्म को देखने आएं जिसका मैं सिर्फ एक हिस्सा होता हूं। मेरी फिल्मों में कहानी का बहुत महत्व होता है, फिल्म कहने का अंदाज महत्वपूर्ण होता है।