लगभग सात महीने बाद दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए गए रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का कहना है कि कुंडा कांड में वह साजिश का शिकार हुए।
उनके खिलाफ साजिश करने वाले पार्टी के बाहर के लोग हैं। वह इनके नाम का खुलासा करना नहीं चाहते।
उन्हें इस बात का भी खेद है कि कुछ न्यूज चैनलों ने बगैर जांच के उनके बारे में धारणा बना ली और दुष्प्रचार किया। कुंडा कांड में नाम उछलने के बाद उन्होंने जो बात कही थी, आज भी उसी पर कायम हैं।
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने उन्हें बेदाग करार दिया है। ऐसे में उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों को खुद ही अपनी समीक्षा करनी चाहिए।
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शुक्रवार को शपथ ग्रहण के बाद राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में राजा भैया ने कहा कि वह शुरू से ही कहते रहे हैं कि कुंडा कांड से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए।
उन्होंने खुद सीबीआई जांच, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की पेशकश की। किसी जांच में आरोप सिद्ध नहीं हुए और वह बेदाग बरी हो गए।
नेताजी (मुलायम सिंह यादव) व मुख्यमंत्री ने उनके ऊपर जो विश्वास किया है, उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि सपा में न तो जातिवाद है और न ही पार्टी कमजोर है।
यह पूछे जाने पर क्या वह मुजफ्फरनगर जाएंगे? राजा भैया ने कहा कि मंत्री पूरे प्रदेश का होता है। मुख्यमंत्री जो भी दायित्व देंगे, उसे पूरी क्षमता के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।
मुकदमे मायावती की देन
राजा भैया के ऊपर पहले से दर्ज अन्य मुकदमों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये मुकदमे मायावती की देन और बसपा का प्रसाद हैं।
मीडिया में कुछ लोगों की न्यूसेंस वैल्यू है और उन्हीं के बयान को तूल देकर तिल का ताड़ बना दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी से जनता को कोई नाराजगी नहीं है।
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