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राज बब्बर ने अटल जी से कहा, मैं आपके खिलाफ चुनाव लड़ रहा हूं, आशीर्वाद दें...

Sun, 25 Dec 2016 01:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अटल बिहारी वाजपेयी व राज बब्बर - फोटो : amar ujala
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मौजूदा राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी जैसा व्यक्तित्व व भाव शायद अब आना बंद हो गए हैं। आज राजनीति से जुड़े कुछ लोग यदि इसका पालन करें तो राजनीति का स्तर ऊंचा हो सकता है।
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हालांकि, मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि अगर उनके जैसे व्यक्तित्व व भाव का पालन नहीं किया गया तो वे जिन पदों पर आसीन थे उसकी गरिमा को ठेस पहुंचेगी।

आज हम चाहे किसी भी पार्टी में क्यों न हों लेकिन जब भी हमें राजनीति में बेहतरीन व मानवीय उदाहरण की बात करनी होती है तो केवल अटल बिहारी वाजपेयी का ही चेहरा सामने आता है।
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दलगत भावना से ऊपर उठकर राजनीति करने वाले अटल जी हम सभी के लिए आदर्श हैं। उनके व्यक्तित्व का ही कमाल था कि वे विरोधियों को भी अपने शब्दों की सत्ता से अपना बना लेते थे।

उनसे जीतने का आशीर्वाद मांगा तो वो मुस्करा दिए

लखनऊ में जब मुझसे अटल जी के खिलाफ चुनाव लड़ने को कहा गया तो पहले मैं कुछ समझ नहीं पाया क्योंकि उनके जैसे व्यक्तित्व के सामने मेरी क्या जुर्रत थी। लेकिन जब पार्टी ने मुझसे कहा तो मैंने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया।

जिस दिन मैंने पर्चा भरा उसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी भी पर्चा भरकर वापस दिल्ली जा रहे थे। उनसे मेरी मुलाकात फ्लाइट में हो गई। वे 1-एस सीट पर बैठे थे। मैं उनके पास गया और जाते ही मैंने सबसे पहले उनके पैर छुए...। फिर चुनाव में जीतने का आशीर्वाद मांगा। इस पर वे कुछ बोले नहीं सिर्फ मुस्कुरा दिए...।

उनके पास बड़ी मूछों वाले उनके पीएस शिवकुमार जी खड़े यह सब देख रहे थे। मैंने फिर उनसे कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए क्योंकि जबसे मैंने होश संभाला है और जिस राजनीतिक व्यक्ति की भाषा ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है वह आप ही हैं। आपकी सभाओं को सुनने के लिए मैं अपने घर आगरा में सूरजभान फाटक तक जाता था।
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मुझे पूरा भरोसा है कि तुम ऐसा बिल्कुल नहीं करोगे...

मैंने उनसे यही कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए कि चुनाव में मुझसे किसी भी प्रकार की ऐसी भाषा का इस्तेमाल न हो जाए जिस कारण बाद में मुझे तकलीफ या शर्मिंदगी हो क्योंकि मैं आपकी भाषा की गरिमा से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा हूं।

इस कारण डर लग रहा है कि कहीं चुनाव के दौरान इस गरिमा को ठेस न पहुंच जाए। इस पर अटल जी मुस्कुराए और बोले- मुझे पूरा भरोसा है कि तुम ऐसा बिल्कुल नहीं करोगे। कुछ इस तरह का व्यक्तित्व है अटल जी का। वे विरोधियों से भी इसी आत्मीयता से मिलते थे।

इसके बाद मैं जब राज्यसभा में था, उस समय अटल जी प्रधानमंत्री बनकर आए थे। एक रोज संसद भवन से वे निकल रहे थे। मैं प्रधानमंत्री की सुरक्षा के चलते वहीं किनारे खड़ा हो गया। अटल जी ने मुझे देखा और मेरे पास आए...बोले, तुमने संयम से काम लिया। तुम काफी आगे बढ़ोगे।

आज की राजनीति में जिस तरह से मूल्यों का पतन हो रहा है उसमें वाजपेयी जैसे व्यक्तित्व की बहुत जरूरत है। हम ईश्वर से उनकी लंबी आयु की कामना करते हैं। भगवान उन्हें अच्छी सेहत प्रदान करें।
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