30 लाख रुपये की लागत से तैयार परिवहन निगम की जनता एसी बसें (जनरथ) बेमौसम हुई बारिश में ही टपकने लगीं। रोडवेज ने कुल 116 बसें विभिन्न डिपो मेें संचालन के लिए दी थीं। इनमें से पांच बसों की छत से पानी टपकने की बात प्रबंध निदेशक भी स्वीकार कर रहे हैं।
हालांकि गोंडा डिपो को दी गई चार जनरथ बसों की छत से पानी टपकने की बात उनके संज्ञान में नहीं है। इस तरह अब तक नौ बसों की छतों से पानी टपकने के मामले सामने आ चुके हैं। तकनीकी इकाई को निर्देश दिए गए हैं कि बॉडी बनाने वाली चार फर्मों को तत्काल ब्लैक लिस्ट करने का नोटिस जारी कर 15 फरवरी तक उससे जवाब तलब किया जाए। जवाब संतोषजनक न होने पर फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
गोंडा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक वीके वर्मा ने बताया कि 19 जनवरी को जो चार जनरथ बसें मिली थीं, उन सभी की छत से पानी टपक रहा था। इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई थी। इस पर फर्म के कारीगर ने छत दुरुस्त की है। प्रबंध निदेशक ने बस के निर्माण में लापरवाही बरतने की पोल खुलते ही सभी बसाें की तीन चरण में जांच कराने के निर्देश दिए हैं। 15 फरवरी से पहले कानपुर स्थित सेंट्रल वर्कशॉप के अधिकारी जांच करेंगे। इसके बाद थर्ड पार्टी रेंडम चेकिंग करेगी। थर्ड पार्टी सभी बसों की जांच करेगी जिसकी वीडियोग्राफी भी होगी।
लखनऊ में दबा मामला
परिवहन निगम ने लखनऊ परिक्षेत्र को नौ जनरथ बसें आवंटित की थीं। ये बसें गोमतीनगर स्थित कार्यालय में खड़ी थीं। बीते दिनों हुई बारिश के दौरान चालकों ने 5 बसों की छत से पानी टपकने की शिकायत की। यह मामला दब गया और आनन-फानन मेें फर्म के कारीगरों को बुलाकर उनको सही कराया गया।
गोंडा डिपो की जनरथ बस बृहस्पतिवार को लखनऊ से रवाना होने वाली थी। इससे पहले उसकी बॉडी बनाने वाली फर्म का कारीगर बस की छत पर चढ़कर मेंटेनेंस करने लगा। बस में एक पत्रकार भी सवार था, जिसने कारीगर से बातचीत की तो छत से पानी टपकने का खुलासा हुआ। इसका वीडियो बनाकर परिवहन निगम के सोशल मीडिया ग्रुप पर पोस्ट किया गया, तब इस मामले का संज्ञान लिया गया।
भुगतान पर रोक, जांच टीम को नोटिस
बसोेें से पानी टपकने की जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आएगी और उस पर निर्णय नहीं होगा, तब तक फर्म के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में वित्त इकाई को निर्देश दिए गएं हैं। जिस टीम ने जांच की थी उसको भी कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब तलब किया गया है। - डॉ. राजशेखर, प्रबंध निदेशक, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम