पांच माह पहले उतरेटिया रेलवे स्टेशन के पास लखनऊ आ रही सद्भावना एक्सप्रेस की जनरल बोगी के पहियों से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं।
यात्रियों के शोर मचाने पर ट्रेन के गार्ड की उस पर नजर पड़ी। सूचना पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोका गया। बड़ा हादसा टला।
वहीं वर्ष 2012 दिसंबर में प्रतापगढ़ लखनऊ रेलखंड पर कोयला लदी मालगाड़ी के एक वैगन का ब्रेक एक्सल जाम हो गया था।
बीच रास्ते वैगन जाम होने के कारण मालगाड़ी के 12 वैगन झटका लगते ही पटरी से उतर गए। हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई,लेकिन करीब दो दिनों तक ट्रेन संचालन अस्तव्यस्त रहा।
बोगियों और वैगन के निरीक्षण में होने वाली कमी इस तरह के हादसों का कारण बन रही है। रेलवे इन हादसों को रोकने के लिए अब ऑनलाइन मॉनीटरिंग एंड रोलिंग स्टॉक (ओएमआरसी) सिस्टम को सभी 17 जोन के महत्वपूर्ण रेलखंडों पर लगाने जा रहा है।
इस नई तकनीक के तहत सेंसर और माइक्रोफोन की मदद से यात्री ट्रेनों की बोगियां, वैगन और लोको इंजन की खामी को मौके पर ही पकड़ा जा सकेगा।
साथ ही निरीक्षण के लिए वेटिंग में बोगियों को रोकना नहीं होगा। इससे बोगियों की किल्लत की समस्या से निजात मिलेगी।
फिलहाल ओएमआरसी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बक्कास सहित देश के केवल 15 स्टेशनों पर ही काम कर रहा है।
दरअसल बोगियों और मालगाड़ी के वैगन के एक्सल, ब्रेक, पहिए और स्प्रिंग ट्राली सहित कई उपकरणों में बीच रास्ते खराबी आ जाती है।
इस खराबी को पकड़ने के लिए रेलवे प्रशासन अपने महत्वपूर्ण स्टेशनों पर सीएंडडब्ल्यू के कर्मचारियों की तैनाती करता है।
रात के समय गुजरने वाली ट्रेनों और मालगाड़ियों के वैगन की कमियों को पकड़ने में मुश्किलें आती हैं। इसे देखते हुए रेलवे ओएमआरएसी सिस्टम के तहत निरीक्षण करेगा।
इसमें सेंसर व माइक्रोफोन लगे सिस्टम अकोस्टिक बीयरिंग डिटेक्टर्स (एबीडी) और व्हील इम्पेक्ट लोड डिटेक्ट (डब्ल्यूआईएलडी) वैगन व बोगियों को इंजन से धक्का देने पर उनमें उठने वाली आवाज को रिकॉर्ड करेंगी। रिकॉर्ड की मदद से खराबी का पता लगाया जाएगा।