राहुल गांधी ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि उनके इस फॉर्मूले का कितना ज्यादा साइड इफेक्ट होगा।
और इसकी वजह से टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में विरोध के स्वर भी फूटने लगेंगे।
पार्टी ने यहां कई ऐसे लोगों को टिकट दे दिया है जो बाहर से आने वाले ‘पैराशूट प्रत्याशी’ हैं। राहुल गांधी हमेशा बाहर से थोपे गए प्रत्याशियों का विरोध करते आए हैं।
लेकिन तय प्रक्रिया के तहत नीचे से आए नामों के पैनल से प्रत्याशी चयन की वकालत करने वाले राहुल यूपी में ही फेल हो गए।
कहीं क्रिकेटर तो कहीं एक्टर
कई लोकसभा सीटों पर पैनल से बाहर के प्रत्याशियों को टिकट दे दिया गया है।
फूलपुर सीट से मोहम्मद कैफ को कांग्रेस ने उतारा है। क्रिकेट से राजनीति में आए इस युवा नेता का नाम पैनल के बजाय ऊपर से ही आया है।
भोजपुरी फिल्मों के कलाकार रवि किशन भी पैराशूट प्रत्याशी बनकर कांग्रेस में आए हैं। उन्हें आलाकमान ने जौनपुर से टिकट दिया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ऐसे पैराशूट प्रत्याशी पार्टी को कितना फायदा पहुंचाते हैं।
दलबदलुओं को भी मिला टिकट
मुजफ्फरनगर सीट से टिकट पाने वाले सूरज सिंह वर्मा बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए हैं। इन्होंने 2004 में बसपा के टिकट से सांसद का चुनाव लड़ा था।
मोहनलालगंज से टिकट पाने वाले नरेंद्र गौतम भी कुछ वर्षों पहले बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए हैं।
इन्हें टिकट मिलने पर कांग्रेस में बगावत भी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव श्यामलाल पुजारी ने विरोध में आमरण अनशन भी शुरू कर दिया है।
कथनी और करनी में फर्क
वहीं, सुल्तानपुर से संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह को टिकट देकर पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस की कथनी व करनी में अंतर है।
इस सीट से संजय सिंह सांसद थे। उनके पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने की चर्चाओं ने कांग्रेस आलाकमान को हिला दिया। इसी के बाद उन्हें असम से राज्यसभा में भेजा गया।
हालांकि, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने इसका विरोध भी किया था। बाद में खुद सोनिया गांधी ने गोगोई को मनाया। संजय सिंह की सीट पर कांग्रेस ने उनकी पत्नी को टिकट दे दिया।