गोंडा-बलरामपुर मार्ग और जरवल-फरेंदा मार्ग...। हालत इतनी जर्जर कि कार से चलने पर सिर गाड़ी की छत से टकराता है। बलरामपुर तक महज 42 किमी का सफर तय करने में डेढ़ घंटा लग जाता है।
जरवल-फरेंदा मार्ग की तो हालत इतनी खस्ता है कि लखनऊ से गोंडा जाने वाले लोग जरवल रोड के बजाय 70 किलोमीटर से अधिक का चक्कर लगाते हुए वाया फैजाबाद-गोंडा जाते हैं। दर्जीकुआं से गौराचौकी वाली सड़क सहित जिले के कई अन्य मार्गों की हालत भी कम जर्जर नहीं।
34 लाख से ज्यादा आबादी वाले जिले में मनकापुर की आईटीआई फैक्ट्री के अलावा कोई इंडस्ट्री नहीं। स्थानीय स्तर पर रोजगार का कोई अन्य साधन नहीं।
जिले से सूरत और मुंबई जाने वाली ट्रेनों के जनरल डिब्बों में बारहों महीने भयानक भीड़ रहती है। लखनऊ में रिक्शा चलाने वालों में गोंडा के अनपढ़ बेरोजगारों की संख्या किसी अन्य जिले से ज्यादा मानी जाती है।
खून से लिखे खत का भी नहीं दिया जवाब
गोंडा के तमाम गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। मनकापुर का भवरियापारा गांव भी उन्हीं में से एक है। गांव के लोग हर नेता से बिजली की मांग करते रहे हैं।
हाल ही में गांव के मेवालाल प्रजापति ने आठ पत्र केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को भेजे। कोई जवाब नहीं आया तो नौवां पत्र खून से लिखकर भेजा। कहते हैं, तकलीफ की बात है कि खून से लिखे पत्र का भी संज्ञान नहीं लिया गया।
गोंडा जिले के लोगों के लिए यह समस्याएं नई नहीं हैं। बरसों से यहां के वाशिंदे जर्जर सड़कें, स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी और कमजोर औद्योगिकीकरण का रोना रोते रहे हैं।
पर पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान जब बगल के जिले बाराबंकी के विकास पुरुष माने जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा यहां से कांग्रेस प्रत्याशी बने तो त्रस्त लोगों की आंखें चमकीं। जब केंद्र की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने तो उम्मीदें परवान चढ़ गईं।
'एक दबाओ, तीन गिरोओ' ने दिलाई थी जीत
हालांकि बेनी को लोकसभा चुनाव में जीत ‘एक दबाओ तीन गिराओ’ के नारे के बल पर मिली थी। फिर भी बेनी को वोट देने वालों को लगा कि बाराबंकी में विकास की गंगा बहाने वाले बेनी बाबू गोंडा की भी किस्मत बदलेंगे।
पिछले साढ़े चार सालों में उन्होंने शिलान्यास तो कई योजनाओं का किया पर कोई इस मुकाम पर नहीं पहुंची कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। उम्मीद करने वाले उदास हैं।
वकील रुचि मोदी कहती हैं कि सपा से विद्रोह के बाद बेनी ने अपनी पार्टी बनाई। अयोध्या से विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन जमानत तक नहीं बचा पाए। इसके बाद राजनीतिक परिदृश्य से ओझल हो गए।
लेकिन लोकसभा चुनाव में गोंडा ने हाशिये पर पड़े बेनी वर्मा की किस्मत संवार दी पर बेनी ने उस बदहाल जिले की तस्वीर बदलने में अपेक्षित दिलचस्पी नहीं दिखाई। पता नहीं किन कारणों से बेनी बाबू ने चुनाव जीतने के बाद गोंडा से मुंह मोड़ सा लिया था।
कांग्रेसियों से भी रही संवादहीनता
स्थानीय कांग्रेसी बृजेश पांडे कहते हैं कि विकास की बात तो दूर बेनी ने उन लोगों का हाल लेना तक मुनासिब नहीं समझा जिन्होंने उनके चुनाव में जी जान लगा दी थी।
आने-जाने का आलम यह रहा कि स्थानीय सांसद की अध्यक्षता वाली सतर्कता व निगरानी समिति की बैठक पिछले 4 सालों में महज दो बार हुई, जबकि हर तीन महीने में इसकी बैठक होनी चाहिए।
इस बेरुखी का असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिली। संसदीय क्षेत्र की सभी पांच सीटों पर सपा ने कब्जा कर लिया।
बेनी को देर से जागने की आदत
विधानसभा चुनाव के बाद बेनी ने गोंडा में अपेक्षाकृत सक्रियता बढ़ाई है। बेनी को करीब से जानने वाले एक बुजुर्ग कांग्रेसी कहते हैं कि, ‘बेनी को सुबह देर से जागने की आदत है। उनकी राजनीति में भी वही हुआ। वह देर से जागे हैं।’
आंख तब खुली जब विधानसभा के चुनाव के दौरान सोनिया गांधी की एक सभा के दौरान स्थानीय लोगों ने बेनी के खिलाफ हल्ला बोल दिया, जिनमें अधिकतर कांग्रेसी ही थे।
इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के कामों में दिलचस्पी ली और आने-जाने का सिलसिला भी बढ़ाया है।
पर जिला विज्ञान क्लब की को-ऑर्डिनेटर रेखा शर्मा कहती हैं कि हम तो यह महसूस ही नहीं कर पाए कि एक पावरफुल केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र के वाशिंदे हैं।
...तो क्या रास्ता रोक पाएंगे अखिलेश
गोंडा में विकास को तरसती आंखों की पीड़ा के मद्देनजर ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले दिनों एक रैली के दौरान लखनऊ-गोंडा मार्ग के चौड़ीकरण, परसपुर में तहसील भवन, नगर पंचायत भवन, स्टेडियम, आईटीआई के निर्माण व घाघरा में पुल बनाने सहित अनेक विकासपरक घोषणाएं की है।
पर देखना है कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बेहद तल्ख बयानबाजी करने वाले बेनी बाबू का रास्ता तंग करने में यह घोषणाएं कितनी कारगर साबित होती हैं। गौरतलब है गोंडा की सभी पांच विधानसभा सीटों पर सपा का कब्जा है।
हावी रही वर्चस्व की राजनीति
1962 तक गोंडा बाहरी लोगों की चरागाह रहा। बाहरी थे, इसलिए उन सांसदों ने यहां के विकास में दिलचस्पी नहीं ली। बाद के दिनों में यहां विकास के बजाय वर्चस्व की राजनीति हावी रही।
औद्योगिकीकरण व विकास के नाम पर आनंद सिंह सिर्फ आईटीआई फैक्ट्री लाए। बेनी को ही विकास के लिए क्यों दोषी ठहराया जाए? कम से कम सोलर लाइट व हैंडपंप तो बांट रहे हैं।
कीर्तिवर्धन हों या बृजभूषण शरण सिंह ने अपना साम्राज्य बढ़ाने के सिवा गोंडा के लिए क्या किया? यहां के नेताओं में विकास की कोई समग्र दृष्टि ही नहीं है। बेनी भी उसी कड़ी के एक शख्स साबित हुए।
बेनी ने बाराबंकी का विकास तब किया जब बीड़ी पिया करते थे, अब प्रिंस कोट पहनते हैं। उनसे विकास की उम्मीद ही बेमानी है। वैसे बेनी को चुनावी मैदान से खारिज करने की बात जल्दबाजी होगी। क्योंकि गोंडा में वोट विकास के नाम पर नहीं बल्कि जातीय प्रतिद्वंद्विता के आधार पर पड़ते हैं।
(ये विचार साहित्यकार डॉ. सूर्यपाल सिंह के हैं)
किसी ने नहीं कराया इतना विकास
बेनी प्रसाद वर्मा ने गोंडा जिले का जितना विकास कराया, उतना आजादी के बाद क्षेत्र के किसी सांसद ने अब तक नहीं कराया। उन्होंने विकास को तरसते गोंडा जिले की तमाम खस्ताहाल सड़कों का निर्माण करवाया।
एक स्टील प्लांट, एक पावर प्लांट, दो आईटीआई, एमिटी स्कूल और आम सुविधा केंद्र का शिलान्यास किया। इस्पात निगम की मदद से जिले के 3 हजार से अधिक नौजवानों को कौशल विकास का प्रशिक्षण कराया गया।
जिन योजनाओं को उन्होंने शिलान्यास किया, जब वो चालू हो जाएंगी तब वह बाराबंकी की तरह गोंडा के भी विकास पुरुष साबित होंगे। क्षेत्र में उनका कम आना कोई मुद्दा नहीं है। केंद्र सरकार में मंत्री होने के नाते दिल्ली में उनकी व्यस्तताएं ज्यादा ही रहती थीं।
(ये विचार बेनी प्रसाद वर्मा के सांसद प्रतिनिधि मो. सबा के हैं)
बेनी ने मांगा एक और मौका
गोंडा के सांसद बेनी प्रसाद वर्मा ने रविवार को कार्यकर्ताओं के बीच सफाई पेश की और अपने लिए एक और अवसर मांगा।
केंद्रीय इस्पात मंत्री व गोंडा के सांसद बेनी प्रसाद वर्मा ने गोंडा-उतरौला रोड स्थित सालपुर बाजार में कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर उन्हें लोकसभा चुुनाव की तैयारी के लिए प्रेरित किया।
बेनी ने नरेंद्र मोदी को बाहरी बताते हुए कहा कि भाजपा में उन्होंने मुरली मनोहर जोशी की जगह ले ली है। मोदी अब लालकृष्ण आडवाणी के क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का नब्ज टटोलने के साथ उनमें जोश भरते हुए कहा कि कांग्रेस का कार्यकर्ता मेहनत कर अपनी पार्टी के नेता को जिताने का काम करता है।