...और संस्थान देता रहा अनुशासन का हवाला
लोहिया संस्थान में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के छात्रों के बाल जीरो मशीन से कटने का मामला सितंबर में उठा था। हालांकि, एंटी रैगिंग सेल कार्रवाई करने के बजाए अनुशासन का हवाला देकर मामले को दबा गई। इससे सीनियर छात्रों का दुस्साहस बढ़ गया। अब वे जूनियर छात्रों को और परेशान कर रहे हैं।
संस्थान में रैगिंग रोकने के लिए प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को हॉस्टल में सुरक्षा देने का दावा किया जाता है। सीनियर छात्रों के हॉस्टल आने-जाने पर पाबंदी है। सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में छात्र हॉस्टल से क्लास तक जाते हैं। कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के दावों के बावजूद रैगिंग पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
रैगिंग रोकने के लिए संस्थान में प्रॉक्टोरियल बोर्ड है। इसके कुछ सदस्यों को छोड़ बाकी अफ सर हाथ पर हाथ धरे रहते हैं। ऐसे में सीनियरों पर कार्रवाई न होने से जूनियर छात्र सहमे हैं। अब वे अपने घर फोन कर मामले की जानकारी दे रहे हैं।
तीसरा बटन देखकर कतार में चलते हैं
कैंपस में नए बैच के छात्र तीसरा बटन देखते हुए कतार बनाकर चलते हैं। बहुत कम छात्र हैं जो गर्दन ऊपर करके चलते हैं।
एंटी रैगिंग सेल में दो शिकायतें आई हैं। हालांकि, इनमें से कोई गंभीर नहीं है। सीनियर छात्रों के गलत शब्दों का चयन करने की बात लिखी गई है। जांच के आदेश हुए हैं। सीनियर छात्र दोषी मिले तो कार्रवाई होगी। - डॉ. विक्रम सिंह, संस्थान प्रवक्ता