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केजीएमयू: डेंटल संकाय पहुंचा रैगिंग का भूत, सीनियर छात्राओं ने जूनियर्स को आदेश न मानने पर दी धमकी

Thu, 25 Oct 2018 01:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
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केजीएमयू में छात्रों के बीच शुरू हुआ रैगिंग का मामला अब छात्राओं तक पहुंच गया है। दो दिन पहले डेंटल संकाय की छात्राओं ने जूनियर छात्राओं की रैगिंग की। दंत संकाय के डीन प्रो. शादाब मोहम्मद के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। दीक्षांत समारोह के बाद कमेटी रिपोर्ट देगी। 
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डेंटल की कुछ छात्राओं ने रैगिंग सेल में इसकी लिखित शिकायत की है। तृतीय वर्ष की छात्राओं का आरोप है कि वे क्लास में जा रही थीं। इस दौरान फाइनल ईयर की छात्राओं ने उन्हें घेर लिया। रैगिंग की। सीनियरों के हर आदेश को मानने, उनके सामने सिर झुकाकर चलने की सीख दी गई।

साथ ही आदेश न मानने का खामियाजा भुगतने की धमकी भी दी गई।  इस संबंध में प्रो. शादाब मोहम्मद का कहना है कि प्रथम दृष्टया छात्राओं के बीच आपसी विवाद लग रहा है। सीनियर छात्रा दोषी होंगी तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दंत संकाय में तो क्लासरूम और लैब में भी रैगिंग होने की शिकायत होती रही है। बताया जाता है कि दंत संकाय में परीक्षा छोड़ने वाले छात्रों की संख्या अधिक होती है। ऐसे में छह माह तक परीक्षा छोड़ने वाले छात्र-छात्राएं और जूनियर छात्र-छात्राएं एक साथ क्लास में बैठते हैं। इस दौरान परीक्षा छोड़ने वाले खुद को सीनियर समझते हैं  और जूनियरों की रैगिंग से पीछे नहीं हटते हैं। लाइब्रेरी और लैब में भी जूनियर छात्र अक्सर सीनियर छात्रों के निशाने पर रहते हैं। 

छात्रों के रैगिंग मामले में शुरू हुई जांच

डेमो
केजीएमयू में छह छात्रों के निष्कासन के बाद एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों की रैगिंग मामले की भी जांच शुरू हो गई है। इसके लिए स्टूडेंट वेलफेयर डीन प्रो. जीपी सिंह के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई है। प्रो. जीपी सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है।

अभी तक छात्रों ने किसी छात्र का नाम नहीं बताया है। जिस भी छात्रा का नाम रैगिंग में सामने आएगा, उसके खिलाफ हर हाल में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि छह छात्रों के  निष्काषन वाले मामले की भी अलग से जांच की जा रही है। जब तक कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट नहीं देगी तब तक उन छात्रों को कैंपस में घुसने नहीं दिया जाएगा।

यह है मामला
केजीएमयू में लगातार रैगिंग हो रही है। पहले प्रथम वर्ष के छात्रों का रैगिंग संबंधी वीडियो वायरल हुआ तो सभी सीनियर छात्रों पर सामूहिक रूप से एक-एक हजार रुपया जुर्माना लगा था। इसके बाद भी सीनियर छात्र नहीं मानें और रैगिंग की तो छह छात्रों को निलंबित कर दिया गया और उनके कैंपस में घुसने पर पाबंदी लगा दी गई है।

छह छात्रों के निष्कासन से गुस्साए सीनियर छात्रों ने दोबारा रैगिंग करना शुरू कर दिया। इस पर जूनियर छात्रों ने एक बार फिर पूरे मामले की शिकायत एंटी रैगिंग कमेटी से की है। इस शिकायत के बाद केजीएमयू प्रशासन ने प्रो. जीपी सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की है।

हॉस्टल में दिखाने को लगे हैं कैमरे

डेेमो
 केजीएमयू के हॉस्टल में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और रैगिंग को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं, लेकिन ये कैमरे दिखावटी हैं। हालत यह है कि इनका बैकअप सिर्फ एक दिन का रहता है। दूसरे दिन खोजने पर बैकअप नहीं मिलता है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र न्यू सीवी हॉस्टल में रहते हैं।

इस हॉस्टल में छह सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। ये कैमरे मुख्य गेट से लेकर कमरों के चारों कोने पर लगाए गए हैं। इससे कमरे में आने जाने वाले हर व्यक्ति को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यदि सीसीटीवी कैमरे का बैकअप रहे तो रैगिंग के मामले में जांच कर रही कमेटी को काफी सहूलियत मिलती, लेकिन ऐसा नहीं है।

सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों रैगिंग मामले की जांच कमेटी हॉस्टल पहुंची तो वहां मौजूद स्टाफ ने सिर्फ एक दिन का बैकअप होने की बात बताई। इससे सीसीटीवी फुटेज के जरिये रैगिंग करने वालों तक पहुंचने की मंशा धरी रह गई।
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कम से कम सप्ताहभर का बैकअप जरूरी

आईटी सेल के जानकारों की मानें तो कम से कम सात दिन का बैकअप होना जरूरी होता है। यदि एक दिन का बैकअप है तो स्टोरेज डाटा का कोई मतलब नहीं होता है। फिर तो सिर्फ रनिंग मोड में सीसीटीवी चल रहा है। इसमें कोई अतिरिक्त खर्चा भी नहीं आता है।

हार्ड डिस्क में स्टोर होने वाले डाटा को सप्ताहभर बाद डीवीडी में सेव करके रखा जाता है। केजीएमयू के विभिन्न विभागों में सप्ताहभर तक बैकअप रखा जाता है। ऐसे में हॉस्टल का बैकअप एक दिन का रखना अपने आप में संदेहास्पद है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
आईटीसेल के प्रभारी डॉ. संदीप भट्टाचार्य का कहना है कि हॉस्टल में सिर्फ एक दिन का बैकअप है, इसकी जानकारी नहीं है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी हॉस्टल प्रभारी की होती है। पता कराते हैं कि वहां सिर्फ एक दिन का बैकअप क्यों रखा जा रहा है। आमतौर पर सात दिन का बैकअप रखा जाना चाहिए।

 
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