रायबरेली। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हंगामा करने वाली युवती जमानत पर जेल से रिहा हो गई। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब भी कई सवाल बरकरार हैं, जिनके जवाब किसी के पास नहीं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि महज हंगामा करने पर थाना प्रभारी की तहरीर पर क्यों युवती खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया।
जिस तरह पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाई, यदि पहले पीड़िता के मामले को गंभीरता से लेती तो शायद इसको लेकर सियासत गर्म न होती और पुलिस की किरकिरी होने से बच जाती। एसपी ने पूरे प्रकरण की जांच सीओ सदर अमित सिंह को सौंपी है।
बस्तेपुर की रहने वाली रचना मौर्य बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय अपनी फरियाद लेकर आई थी। इस दौरान रचना ने हंगामा किया था। रचना के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया था। यहां तक थाना प्रभारी पर युवती को जूता मारने का आरोप लगा था।
यह प्रकरण बृहस्पतिवार को उस समय और गरमा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमर उजाला में छपी खबर व फोटो को एक्स करके प्रदेश सरकार को घेरा। सपा, कांग्रेस के पदाधिकारियों ने भी जहां नाराजगी जताई, वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष बुद्धीलाल पासी ने इस प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री से करनी की बात कही।
मामला तूल पकड़ने पर युवती को जेल से जमानत मिल गई और वह बाहर आ गई। जेलर हिमांशू रौतेला ने बताया कि एसडीएम कोर्ट से धारा-151 मेंं रचना को जेल भेजा गया था। 12 दिसंबर को जमानत पर रचना को रिहा कर दिया गया।