लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए घरों, प्रतिष्ठानों और सरकारी दफ्तरों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। इसे कूड़ा उठाने आने वाले कर्मचारी मोबाइल फोन से स्कैन करेंगे। इस डिजिटल प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कूड़ा रोज उठ रहा है या नहीं। जिले में एक अप्रैल से यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।
पंचायतीराज विभाग ने इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए आरआरसी मोबाइल सर्वेक्षण एप तैयार किया है। इससे निगरानी, प्रगति और रिपोर्टिंग ऑनलाइन होगी। इस एप का परीक्षण एक माह पहले किया गया था, जो सफल रहा। जिले में एप का इस्तेमाल फिलहाल 50 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जाएगा। यदि यह सफल रहता है, तो इसे जिले की सभी 491 ग्राम पंचायतों के साथ भविष्य में पूरे प्रदेश और अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
ऐसे काम करेगा क्यूआर कोड
ग्राम पंचायतों में घरों, दुकानों, सरकारी व निजी प्रतिष्ठानों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, सीएचसी, पीएचसी आदि के बाहर क्यूआर कोड चस्पा किया जाएगा। जब कर्मचारी कूड़ा उठाने पहुंचेंगे तो उन्हें इसे स्कैन करना होगा। इससे कूड़ा उठाने की तारीख, समय, स्थान और कर्मचारी की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज हो जाएगी। गीला-सूखा कूड़ा कब और कहां से उठाया गया है, ये भी जानकारी दर्ज हो जाएगी। कूड़ा उठाने के बाद उसे पंचायत के आरआरसी सेंटर भेजा जाएगा। यहां समय व निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी भी एप में दर्ज होगी। प्रतिदिन कूड़े की तस्वीरें अपलोड की जाएंगी और रिपोर्ट जिला मुख्यालय से निगरानी की जाएगी।
एप से पंचायतों में स्वच्छता की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। इससे कर्मियों की उपस्थिति, उनकी कार्यक्षमता व कूड़ा निस्तारण की पूरी प्रक्रिया डिजिटली ट्रैक होगी। आरआरसी एप का लॉगिन पासवर्ड पंचायत सहायक के पास होगा। पंचायत सहायक को सभी सूचनाएं एप में फीड करनी होंगी।
- जितेंद्र गौड़, जिला पंचायत राज अधिकारी