आखिरकार तीन दिन से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के तल्ख तेवरों का असर शनिवार को दिखा और सपा के संसदीय बोर्ड ने जेल में बंद मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का पार्टी में विलय रद्द कर दिया।
यह पहली बार है जब सपा को पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के किसी फैसले पर रोल बैक करना पड़ा। यही नहीं, विलय में मध्यस्थता करने को लेकर बर्खास्त किए गए माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव की 27 जून को कैबिनेट में फिर वापसी होगी।
कौमी एकता दल के सपा में विलय के बाद से ही पार्टी की अंदरूनी राजनीति गरमाई हुई थी। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद शनिवार को केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी। प्रदेश मुख्यालय में मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में करीब दो घंटे तक चली बैठक में मुख्यमंत्री की लाइन को सही माना गया।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि आपराधिक गतिविधियों वाले लोगों को सपा में शामिल करने से विकास का मुद्दा पीछे चला जाएगा। चुनावी साल में ऐसे फैसलों का राजनीतिक नुकसान होगा। बैठक के बाद राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में माना कि कौमी एकता दल का विलय और बलराम यादव की बर्खास्तगी एक दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे थे।