पायरिया दांतों को नुकसान तो करता ही है, लेकिन यह हार्ट के लिए भी बड़ी समस्या है। ऐसे में लोगों को पायरिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह जानकारी गुड़गांव से आए डॉ. अगम भटनागर ने रविवार को साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘डेंटल शो’ में दी।
उन्होंने बताया कि 80 फीसदी लोगों को दांतों में कैविटी की समस्या है। इसमें करीब 70 फीसदी लोगों को पायरिया होता है, और पायरिया के कारण लुडविक एंजाइना बीमारी हो जाती है। इसे कैविटी की अंतिम अवस्थाओं में से एक माना जाता है।
लुडविक एंजाइना के कारण दांतों और मसूढ़ों के बीच से पस निकलने लगता है। कीड़े की समस्या भी होती है। मसूढ़ों और दांतों के बीच से लगातार पस निकलने से हार्ट की नसें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और दिल की बीमारी के खतरे बढ़ जाते हैं। इसके अलावा पेट और डायबिटीज की समस्याएं भी होती हैं।
मीडिया प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि डेंटल शो के अंतिम दिन रविवार को डॉ. विपुल श्रीवास्तव ने फोटोग्राफी, डॉ. विमल कालिया ने इलेक्ट्रॉनिक कोरट्री, डॉ. संदीप सिंह ने बोन रिजनरेट, डॉ. सीपी तिवारी और डॉ. राकेश वर्मा ने डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग के बारे में बताया।
30 साल की उम्र के बाद दांतों का नियमित चेक अप जरूरी है। ग्रामीण इलाकों में दांत की बीमारियों में से 90 फीसदी लोगों को पायरिया हो रहा है। इसका प्रमुख कारण है दांतों की ठीक से सफाई न होना। हालांकि ग्रामीण इलाकों में पायरिया की शिकायत होने पर लोग डॉक्टरों के पास जाने के बजाय घरेलू उपचार करने लगते हैं। इससे समस्याएं बढ़ जाती हैं।
डॉ. अभिषेक यादव