सड़क निर्माण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति पर अमल करते हुए लोकनिर्माण विभाग (पीब्डल्यूडी) के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) आलोक रमन को बर्खास्त करने के आदेश दिए हैं। दरअसल, वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 सड़कों के निर्माण के लिए फंड जारी किया गया था। लेकिन सड़कें न बनने पर विधायकों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से शिकायत की। इसके बाद आरोप सही पाए जाने पर एक्सईएन रमन के खिलाफ कार्रवाई की गई। शेष 19 आरोपी इंजीनियरों के मामले में भी जल्द फैसला लिया जाएगा।
ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया। इस टीम ने अपनी जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही इस धनराशि के बड़े हिस्से के गबन की आशंका भी जताई।
इसके बाद मामले की विस्तृत जांच पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क आरसी बरनवाल को सौंपी गई। शासन को भेजी उनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि बस्ती में बड़े पैमाने पर धनराशि का एक मद से दूसरे मद में डायवर्जन किया गया। नियमानुसार, ऐसा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए एक्सईएन आलोक रमन को जिम्मेदार ठहराते हुए बरनवाल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उन्होंने उन सड़कों पर भी फंड डायवर्ट दिखाया है, जो काम किसी स्तर से स्वीकृत नहीं थे।
उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील नियमावली)-1999 के तहत जांच की प्रक्रिया पूरी करते हुए एक्सईएन आलोक रमण को बर्खास्त करने की संस्तुति के साथ फाइल उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भेजी गई। उप मुख्यमंत्री ने बर्खास्तगी की संस्तुति पर शुक्रवार को मुहर लगा दी। यह भी आदेश दिया है कि इनके कृत्य से हुई शासकीय धनराशि की हानि की वसूली भी होगी।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इस मामले में 2 सहायक और 17 अवर अभियंताओं के खिलाफ भी कार्यवाही की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।