पलिया-शाहजहांपुर-हरदोई-लखनऊ हाईवे (एनएच-731) के गड्ढे भरने में बड़ा घपला सामने आया है। शाहजहांपुर में इस सड़क के 58 किमी लंबे हिस्से को ठीक करने के लिए दो करोड़ रुपये दिए गए। यह रकम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दी थी, लेकिन मौके पर जो काम मिला, वह बमुश्किल एक करोड़ रुपये का था। उच्चस्तर पर इस प्रकरण को काफी गंभीरता से लिया गया है। इस मामले में संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
वित्त वर्ष 2021-22 में एनएचएआई ने एनएच-731 के गड्ढे भरने के लिए शाहजहांपुर के पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड 2.06 करोड़ रुपये दिए। 58 किमी लंबी सड़क को गड्ढामुक्त करने के लिए यह राशि पर्याप्त थी, लेकिन इसके बावजूद गड्ढों से इस सड़क पर सफर मुश्किल हो गया। इसकी जांच के लिए बरेली मंडल में तैनात अधीक्षण अभियंता अजय शंकर सिंह की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई।
इस समिति की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी मुख्यालय को मिल गई है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क को गड्ढा मुक्त करने के लिए डब्ल्यूएमएम (वेट मिक्स मैकेडम यानी पानी मिली तारकोल व गिट्टी) व डीबीएम (डेंस बिटुमनस मैकेडम यानी तारकोल व गिट्टी की परत) का काम कम कराया गया। वहीं, ऊपरी सतह को चिकना दिखाने के लिए बीसी (बिटुमनस कंक्रीट) का काम ज्यादा कराया गया। डब्ल्यूएमएम और डीबीएम के बिना बीसी ज्यादा दिन तक नहीं टिकती है। रिपोर्ट में काम को न सिर्फ असंतोषजनक बताया गया है, बल्कि कहा गया है कि जितनी राशि दी गई थी, उसका आधा ही काम कराया गया।
उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार, स्थिति से शासन को अवगत करा दिया गया है। रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता ग्रामीण सड़क को भेजी गई। मुख्यालय के माध्यम से यह रिपोर्ट शासन को पहुंचने पर इस मामले में कड़ी कार्रवाई का फैसला किया गया है। इसलिए माना जा रहा है कि पूरे मामले में शीघ्र ही कई इंजीनियर नपेंगे।
क्या है कहता है नियम
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, सड़क निर्माण में घपला मिलने पर नुकसान की भरपाई संबंधित ठेकेदार, अवर अभियंता (जेई), सहायक अभियंता(एई) और अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) से करने का भी प्रावधान है। इसमें 50 फीसदी राशि ठेकेदार से और शेष 50 फीसदी राशि तीनों अभियंताओं से वसूली का प्रावधान है।