हेंवती न होने से रुका गेहूं का विकास।
श्रावस्ती। तराई में मौसम ने किसानों को दगा दे दी है। हेंवती (शरदऋतु में होने वाली बारिश) न होने से जहां किसान परेशान थे। वहीं, अचानक मौसम में आए बदलाव ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में अन्नदाता पैदावार को लेकर चिंतित दिखने लगे हैं।
खेतों में लगी गेहूं की फसल अपेक्षित कोहरा न गिरने के कारण समुचित विकास नहीं कर पा रही है। वहीं हेंवती न होने के कारण फसलों पर पड़ा कोहरा व पाला भी नहीं धुला। बीच-बीच में निकलने वाली चटकीली धूप खेतों की नमी कम कर रही है।
ऐसे में खेतों में लगी अलसी, मसूर, चना, मटर, अरहर व सरसों तथा तोरिया सहित अन्य दलहनी व तिलहनी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। पूस मास में बरसात न होने से जहां गेहूं की पैदावार घटने की आशंका है। वहीं, अचानक से मौसम के मिजाज में आए बदलाव व चढ़ते पारे के कारण किसानों को गेहूं की पैदावार घट कर आधा होने की चिंता सताने लगी है।
भिनगा के मदरहवा निवासी किसान राम जियावन बताते हैं कि यदि पूस मास में बरसात होती तो गेहूं की पैदावार दोगुना होना तय था लेकिन हेंवती न होने व चटक धूप के कारण नमी कम होने से गेहूं की फसल विकास नहीं कर सकी। इसका असर पैदावार पड़ना तय है। सिरसिया के बनकटवा निवासी किसान रामधीरज पासवान बताते हैं कि उन्होंने अपने छोटे बेटे का विवाह तय कर रखा है। खेतों में लगी गेहूं की फसल के सहारे विवाह करने की सोचा था लेकिन मौसम की बेरुखी से ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ने किसी से उधार लेना पड़ेगा। ऐसा ही कहना कुछ अन्य किसानों का भी है जो गेहूं की फसल खराब होने की बात कहते हैं।