अगर आपकी उम्र 30 साल के करीब है। इसके बावजूद चलने या लेटने पर आपकी सांस फूलती है। पांव या शरीर में सूजन है। पहले से हार्ट संबंधी समस्या हो या पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन (पीएएच) हो या उसकी दवाएं चल रही हों, तो मरीज को पीएएच क्लीनिक में दिखाया जा सकता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मंगलवार को पीएएच क्लीनिक की शुरुआत हुई। संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग में हर सोमवार दोपहर दो से शाम चार बजे के बीच कमरा नंबर 22 में इसकी ओपीडी चलेगी। डॉ. आशीष झा इसमें मरीजों को परामर्श देंगे।
कॉर्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि पीएएच वह बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की धमनियां सिकुड़ जाती हैं या उनका रक्तचाप बढ़ जाता है। इसमें व्यक्ति को बहुत जल्दी थकान आने, सांस फूलने, सीने में भारीपन, शरीर या पेट पर सूजन आने की समस्या हो सकती है। आमतौर पर यह बीमारी कम उम्र में करीब 30 वर्ष के आसपास होती है।
अन्य देशों के मुकाबले भारत में 10 साल पहले हो रही दिल की बीमारी
डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि भारत में दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा है। अन्य देशों के मुकाबले यहां पर लोगों को दस साल पहले ही यह बीमारी घेरने लगती है। इसके इलाज से बेहतर है कि हम बचाव पर भी ध्यान दें। युवाओं में भी दिल की बीमारी काफी बढ़ रही है। इसके प्रमुख कारणों में व्यायाम न करना, खानपान में फास्ट फूड का चलन, धूम्रपान, नशा, नियमित नींद न लेना, तनाव आदि हैं।
ये रोगी ले सकते हैं सुविधा का लाभ
हृदय की मांसपेशियां या पंपिंग कमजोर हो, चलने या लेटने पर सांस फूलती हो, पांव या शरीर में सूजन, हार्ट फेल या पीएएच की जानकारी हो चुकी हो या फिर दवाएं चल रही हों।