सीएए और एनआरसी के विरोध में चंद महिलाओं के साथ घंटाघर पहुंचने वाली कौसर की पहल महिलाओं का आंदोलन बन गई।
चार पांच महिलाओं के साथ उनके घंटाघर पहुंचने के बाद इलाके से शबी फातिमा, रुखसाना जिया, इरम नकवी, फौजिया के साथ कुछ महिलाएं भी यहां पहुंची थीं।
देखते देखते महिलाओं का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया। लगातार सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल होते रहे।