वहीं, 57.22 किमी लंबे गोला-शाहजहांपुर मार्ग को टू लेन (10 मीटर चौड़ा) करने पर 418.45 करोड़ रुपये खर्च होंगे और काम 18 माह में पूरा होगा। विश्व बैंक ने गोला-शाहजहांपुर मार्ग के लिए 400 मिलियन डॉलर का लोन स्वीकृत किया है। इसे भी 18 माह में बनाना होगा। इसी तरह कप्तानगंज-नौरंगिया एवं कप्तानगंज-हाटा-गौरी बाजार-बरहज-रुद्रपुर और रुद्रपुर बाईपास मार्ग को टू लेन किया जाएगा।
85 किमी लंबी इस सड़क पर 384.6 करोड़ रुपये खर्च होंगे और कार्य 18 माह में पूरा करना होगा। इसके लिए भी एडीबी से 300 मिलियन डॉलर कर्ज की मंजूरी मिल चुकी है। मंत्री ने बताया कि अलीगंज-सोरों मार्ग को टू लेन करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। 18 माह में बनने वाली इस सड़क पर 162.54 करोड़ रुपये खर्च होगें। इसके लिए भी एडीबी से लोन लेने को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने इन सड़कों को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड में बनाने को मंजूरी दी है। साथ ही इन्हें चौड़ा करने के लिए इंडियन रोड कांग्रेस के पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) के मानकों में भी ढील दी गई है। क्या इन सड़कों पर टोल भी वसूला जाएगा। इस पर शर्मा ने कहा कि इस पर फैसला जल्द होगा।
विश्व बैंक और एडीबी से ऋण मंजूर : अग्रवाल
पीडब्ल्यूडी के अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि सड़कों के लिए विश्वबैंक ने 3085 करोड़ रुपये और एडीबी ने 2800 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया है। यह राशि सिविल वर्क पर खर्च की जा सकेगी।
प्रदेश में अब निजी विश्वविद्यालय पहले से आधी जमीन में बन सकेंगे। कैबिनेट ने जमीन संबंधी मानकों में बदलाव के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पहले निजी क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए शहरी क्षेत्र में 40 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन एक ही स्थान पर होना जरूरी था।
इतनी जमीन की एक साथ व्यवस्था करने में दिक्कत के कारण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश नहीं हो पा रहा था। अब इसे दूर करने के लिए भूमि संबंधी मानकों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब शहरी क्षेत्र में 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन एक साथ होने पर निजी विश्वविद्यालय की स्थापना हो सकेगी। शेष मानक एवं शर्तें यथावत रहेंगी।
तीन परियाजनाओं की बढ़ी लागत को मंजूरी
कैबिनेट ने तीन परियोजनाओं की बढ़ी लागत को मंजूरी दे दी है। इनमें ललितपुर की महरौनी तहसील में सजनम नदी पर चल रही भावनी बांध परियोजना, ललितपुर की बंडई परियोजना और सीतापुर-बहराइच मार्ग पर चहलारी घाट के पास घाघरा नदी पर निर्माणाधीन सेतु परियोजना शामिल हैं। कैबिनेट ने भावनी परियोजना के लिए प्रस्तावित लागत 515.59 करोड़ रुपये की तुलना में 512.74 करोड़ रुपये की बढ़ी लागत को मंजूरी दी है।
इसी तरह बंडई परियोजना की प्रस्तावित लागत 336.13 करोड़ की तुलना में 303.54 करोड़ रुपये की बढ़ी लागत और सीतापुर-बहराइच मार्ग पर चहलारी घाट के पास निर्माणाधीन सेतु की पुनरीक्षित लागत 371.15 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। यह रकम सेतु के पहुंच मार्ग, गाइडबंध और सुरक्षात्मक कार्य पर खर्च होगी।
जवाहरपुर, ओबरा सी से बिजली निकासी के लिए नेटवर्क तैयार कराने में आएगी तैजी
बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं को अब यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के स्तर पर ही मंजूरी मिलेगी। कैबिनेट ने इसके लिए विभिन्न कमेटियों के गठन के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से जवाहरपुर व ओबरा सी परियोजना से बिजली निकासी के लिए नेटवर्क तैयार कराने समेत अन्य ट्रांसमिशन परियोजनाओं में तेजी आएगी।
बदायूं तथा फिरोजाबाद में 400 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र व उससे संबंधित लाइनों का निर्माण प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग से होना है। इसके लिए अब तक शासन से गठित कमेटियों से मंजूरी लेनी पड़ती थी। इससे कार्य में विलंब होता था। इसके अलावा एनर्जी टास्क फोर्स को एम्पावर्ड कमेटी के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रस्ताव था।
कैबिनेट ने इसे भी मंजूरी दे दी है। ऊर्जा विभाग के अफसरों का कहना है कि इस फैसले से ट्रांसमिशन परियोजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय निदेशक मंडल स्तर पर ही किए जा सकेंगे। शासन से सिर्फ एम्पावर्ड कमेटी के अनुमोदन की औपचारिकता करानी होगी। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
इलाहाबाद के करछना में 1320 मेगावाट क्षमता का बिजलीघर अब प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के आधार पर लगाया जाएगा। राज्य सरकार ने इस परियोजना को सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित करने का फैसला रद्द कर दिया है। प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के जरिए चुना जाने वाला विकासकर्ता अब तक इस परियोजना पर खर्च हुई रकम की प्रतिपूर्ति मौजूदा डवलपर यानी राज्य विद्युत उत्पादन निगम को करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई।
पहले प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के आधार पर करछना बिजली घर जेपी समूह को आवंटित की गई थी, लेकिन बाद में उसने कदम पीछे खींच लिए। इसके बाद अखिलेश सरकार ने परियोजना को राज्य विद्युत उत्पादन निगम को हस्तांतरित करते हुए इसे सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित करने का फैसला किया था।
योगी सरकार ने अखिलेश के इस फैसले को पटलते हुए अब करछना परियोजना को बिजली मंत्रालय की नई प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग की गाइडलाइन के तहत स्थापित कराने का फैसला किया है। डीपीआर के मुताबिक इस परियोजना पर करीब 10,600 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सरकार का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र में इस परियोजना को स्थापित न करने से इस रकम का इस्तेमाल बिजली से संबंधित अन्य कार्यों में किया जा सकेगा। सरकार का यह भी दावा है कि प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग से स्थापित परियोजनाओं से प्राप्त टैरिफ के मुकाबले सरकारी परियोजनाओं का टैरिफ ज्यादा आता है जो उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत है।
कैबिनेट ने सोनभद्र में जेपी सीमेंट फैक्ट्री के खनन क्षेत्र में ली गई वन भूमि के एवज में 586.178 हेक्टेयर गैर वन भूमि अधिग्रहीत करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह जमीन मिर्जापुर के सदर, मड़िहान और लालगंज तहसील की गैर वन भूमि है, जिसे वनीकरण के लिए वन विभाग को दिया जाएगा।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि भूमि के मूल्य का चार गुना मुआवजा, मालगुजारी के 150 गुने के बराबर पूंजीकृत मूल्य, वार्षिक किराया, पौधरोपण व 10 वर्ष तक रखरखाव का व्यय भी जेपी एसोसिएट्स द्वारा वहन किया जाएगा।
इसके बाद सीमेंट फैक्ट्री के मौजूदा स्वामी अल्ट्राटेक सीमेंट उत्पादन शुरू करेगा। सीमेंट फैक्ट्री के संचालन से जहां सरकार को कर के रूप में राजस्व मिलेगा, वहीं हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा।