सरकारी बजट के कई सौ करोड़ रुपयों की हेराफेरी करने के आरोपी बसपा सरकार के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के दो करीबी एमएलसी की संपत्तियों पर ईडी ने नजरें टिका दी हैं।
दोनों ही एमएलसी के नाम एनआरएचएम घोटाले के समय जांच एजेंसियों के सामने आए थे और उनके इस घोटाले से जुड़ा होने की सूचना पर उनसे पूछताछ भी हुई थी।
इनमें से एक सहारनपुर के एक एमएलसी का नाम लैकफेड घोटाले के दौरान भी चर्चा में आया था।
सीबीआई जैसी जांच एजेंसी ने भी जब पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की संपत्ति कानपुर के एक ग्रुप में लगा होने की जानकारी पर संस्था के संचालक और पूर्व मंत्री के करीबी राज कुशवाहा से पूछताछ की थी।
उस समय भी उसने इस एमएलसी से चार करोड़ रुपये मिले होने की बात कही थी।
ईडी के नियमों के अनुसार तीस लाख से ऊपर की रकम के लेनदेन में विवरण न दिए जाने पर मामला मनीलांड्रिंग एक्ट के तहत आता है।
ऐसे में चार करोड़ से अधिक की रकम दिया जाना भी एमएलसी के खिलाफ साक्ष्य माना गया था।
ईडी को अंदेशा है कि इसी एमएलसी के जरिए पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने लखनऊ के चारबाग इलाके में एपी सेन रोड पर दो भूखंडों को हासिल किया।
ऐसे ही एक अन्य एमएलसी की पूर्व मंत्री के साथी करीबी होने की जानकारी लैकफेड घोटाले की जांच के दौरान सामने आई थी।
यह भी सामने आया था कि पूर्व मंत्री के हजरतगंज स्थित कसमंडा अपार्टमेंट में दो मकान हैं जो उनके एक खास चेले के नाम से है।
ईडी के सूत्रों का कहना है कि अब जांच एजेंसी पूर्व मंत्री की चल-अचल संपत्ति तलाश करने के साथ ही दोनों एमएलसी व उनके करीबियों की संपत्ति पर भी नजर टिका दी है।
इसके तहत ईडी ने आयकर विभाग से भी इनके बारे में जानकारी मांगी है।