नींद बेहद जरूरी है। किशोरों को कम से कम नौ से दस घंटे सोना चाहिए। कम सोने वाले किशोरों की लंबाई कम रह जाती है। यह कहना है आर्टिमिस हॉस्पिटल गुड़गांव के रिस्परेटरी एंड स्लीप मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु गर्ग का।
डॉ. गर्ग कानपुर में हो रहे आईएमए सीजीपी के रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन ‘वेकअप टू स्लीप इट्स इम्पोर्टेंट इन योर प्रेक्टिस’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है कि दूसरे संस्कारों की तरह नींद को भी संस्कार मानें और बच्चों को नींद के बारे में जानकारी दें। युवाओं समेत अन्य लोगों को भी सात से आठ घंटे सोना चाहिए। नींद को कमजोरी की निशानी मानना गलत है।