लखनऊ में हुई बैठक में गंगा संरक्षण के लिए 548 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। समिति ने उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग के लिए राज्य नीति और व्यवसाय मॉडल के विकास तथा एनएमसीजी के लिए एक पॉडकास्ट शृंखला के निर्माण को भी मंजूरी दी है।
गंगा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की 61वीं कार्यकारी समिति की बैठक में 548 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुरादाबाद और कानपुर में नालों को गंगा में गिरने से रोकने की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई।
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कार्यकारी समिति की बैठक में ‘रामगंगा नदी में प्रदूषण की रोकथाम’ के लिए मुरादाबाद जोन-3 और जोन-4 में इंटरसेप्शन, डायवर्जन, एसटीपी और अन्य कार्यों से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। 409.93 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य रामगंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना है।
परियोजना के तहत जोन-3 में 15 एमएलडी और जोन-4 में 65 एमएलडी क्षमता वाले आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। इस योजना में 50 केएलडी क्षमता का सेप्टेज को-ट्रीटमेंट सुविधा भी प्रस्तावित है, जो मलजल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
कार्यकारी समिति की बैठक में कानपुर शहर के 14 अनटैप नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन’ से जुड़ी अहम परियोजना को 138.11 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। नालों से सीधे नदी में गिरने वाले सीवेज को रोककर, उसे प्रस्तावित सीवेज पंपिंग स्टेशनों और मैनहोल के माध्यम से शोधन केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इसमें एक वर्ष के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।