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इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू करने वाली कंपनियों के अटके प्रोजेक्ट जल्द होंगे चालू

Fri, 07 Jun 2019 01:13 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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यूपी इन्वेस्टर्स समिट - फोटो : amar ujala
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राज्य सरकार पर्यटन नीति 2018 की नई नियमावली बनाएगी। जिससे निवेशकों को सब्सिडी व अन्य सुविधाएं दी जा सकेंगी। इसके अभाव में इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू करने वाली कंपनियों के प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। पर्यटन विभाग जल्द ही नियमावली कैबिनेट में पेश करेगा। 
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पर्यटन विभाग ने इन्वेस्टर्स समिट से पहले पर्यटन नीति 2018 लागू की थी। इसमें रामायण सर्किट, ब्रज सर्किट, बुद्ध सर्किट, वाइल्ड लाइफ एवं इको टूरिज्म सर्किट, बुंदेलखंड सर्किट, महाभारत सर्किट, शक्तिपीठ सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, सूफी-कबीर सर्किट व जैन सर्किट में होटल, रिसोर्ट व थीम पार्क बनाने और वेलनेस टूरिज्म व एडवेंचर्स टूरिज्म स्पोर्ट्स यूनिट खोलने पर सब्सिडी व अन्य सुविधाएं देने की योजना है। इस नीति में यूनिट की लागत का 30 प्रतिशत तक सब्सिडी देने के अलावा बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता, औद्योगिक क्षेत्र में होटल खोलने की अनुमति और नगर निकाय के करों में छूट सहित अन्य रियायतें देने का प्रावधान है।
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फरवरी 2018 में हुई इन्वेस्टर्स समिट में देश व प्रदेश की 58 कंपनियों ने पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए एमओयू किया था। इनमें से करीब 15 से ज्यादा कंपनियों ने प्रोजेक्ट पेश कर दिए हैं, लेकिन नीति के अनुसार रियायत व सुविधाएं नहीं मिलने से प्रोजेक्ट कागजों तक सीमित हैं। जबकि सरकार ने निवेशकों को नीति के अनुसार सब्सिडी व सुविधाएं देने के लिए 70 करोड़ का बजट भी मंजूर कर दिया है।

दरसअल, विभाग ने नीति तो 2018 में बनाई थी, लेकिन निवेशकों को नीति में दी गई सुविधाएं व सब्सिडी कैसे दी जाएगी, इसके लिए अभी तक नियमावली नहीं बनाई है। विभाग ने अब नियमावली बनाना शुरू किया है। इसमें निवेशकों को सब्सिडी व सुविधाओं के लिए आवेदन कैसे और कहां करना है, आवेदन का निस्तारण कितने दिन में होगा सहित अन्य मुद्दों पर नियम बनाए जा रहे हैं। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जल्द ही नियमावली को कैबिनेट में पेश कर पारित कराया जाएगा। 
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