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गरीब बच्चों के पास मां के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे, लोगों ने बढ़ाए मदद के लिए हाथ

Fri, 07 Jun 2019 12:53 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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मां की मौत के बाद अनाथ हुए तीन बच्चे - फोटो : अमर उजला
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जिस उम्र में हाथों में कॉपी-किताबें होनी चाहिए थी। माता-पिता का प्यार मिलना चाहिए था, उसी उम्र में तीन अनाथ मासूमों बच्चों ने वह गम झेला, जो शायद आपने कम ही सुना होगा। तीन मासूम बच्चों के सिर से आखिरी उम्मीद का साया भी उनसे दूर चला गया। 
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भीख मांगकर बच्चों का पेट भर रही महिला की गुरुवार को मौत हो गई तो उसके बच्चे अनाथ हो गए। छोटे बच्चे मां की मौत से गमगीन थे तो उन्हें मां की लाश को न सिर्फ कंधा देना था, बल्कि उनका अंतिम संस्कार करना था। पर न तो वह कंधा दे सकते थे और न ही उनके पास इतने रुपये थे कि वह मां का अंतिम संस्कार कर सके। 

इस मुसीबत के समय में समाजसेवियों और पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने मदद के लिए अपने हाथ बढ़ाए। न सिर्फ अंतिम संस्कार के लिए रुपये मुहैया कराए, बल्कि शव का पोस्टमार्टम कराकर अन्य मदद दिलाने का भरोसा भी दिया।
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बछरावां थाना क्षेत्र के सुदौली गांव के रहने वाले सर्वेश की एक साल पहले मौत हो गई थी। खेती बारी न होने के कारण बच्चों की परवरिश करने और उनके लिए दो वक्त की रोजी-रोटी का जुगाड़ करने की जिम्मेदारी पत्नी अंगुरन (40) पर आ गई। 

अंगुरन शहर के ओवरब्रिज के नीचे झोपड़ी बनाकर अपने तीन बच्चों मिथुन (10), खुशबू (6) और रुखसान (6) के साथ रहती थी। यहीं पर भीख मांगकर गुजारा भत्ता करती थी। बुधवार को अंगुरन को सांस लेने में तकलीफ और पेट दर्द होने पर बच्चों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जिसकी सुबह मौत हो गई। 

इन मासूमों को भी नही पता था कि आज इनके सिर से मां का भी साया छीन जाएगा और वह यतीम हो जाएंगे। किसी के शरीर पर कपड़े नहीं तो किसी के पैर पर चप्पल नहीं। यही नहीं खाने पीने के लिए तक के लिए पैसे नहीं थे तो अंतिम संस्कार के लिए रुपये कहां से जुटा पाते।

जिला अस्पताल में अपनी मां के शव के लिए इंताजर कर रहे मासूमों की आंखें निहार रही थी कि इनकी कोई मदद कर दे, जिससे वह अपनी मां का अंतिम संस्कार कर सके। रात में खाने के लिए तो भगवान बनकर डॉक्टर रोशन पटेल आए और खाने के पैसे इन मासूमों को दिए, पर अब इनको आस थी कि अंतिम संस्कार के लिए भी इन्हें कोई मदद करेगा। 

समाजसेवी के रूप में पूर्व मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय के भाई अमिताभ पांडेय, पुरुषोत्तम गुप्ता के अलावा सिटी मजिस्ट्रेट जयचंद्र पांडेय, जिला प्ररोबेशन अधिकारी यूएस मालवीय, सदर कोतवाल अतुल सिंह, जिला अस्पताल चौकी प्रभारी बृजेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे। 

समाजसेवियों और पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने आगे बढ़ाकर इन अनाथ मासूमों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। बच्चों को अंतिम संस्कार के लिए रुपये दिए गए। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि बच्चों की पूरी मदद की जाएगी।
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...और कोतवाल ने करवाया पोस्टमार्टम

मां की मौत से तीन मासूम बच्चे बिलख रहे थे। उन्हें दिलासा देने वाला भी कोई नहीं था। जिला अस्पताल में मां की मौत के बीच गमगीन बैठे बच्चों को जिसने भी देखा, वह अपने आंसुओं को रोक पाया। मां की मौत के बाद जिला अस्पताल के चिकित्सक शव को बच्चों को नहीं सौंप रहे थे। 

पोस्टमार्टम के लिए भी नहीं भेज रहे थे। जानकारी होने पर सदर कोतवाल अतुल सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस-प्रशासनिक अफसरों से बात की। कोतवाल के प्रयास से शव का पंचनामा भरवाया गया। कोतवाल के इस प्रयास की वहां पर मौजूद लोगों ने सराहना की।

बाल कल्याण केंद्र लखनऊ भेेजे गए बच्चे
सदर कोतवाल अतुल सिंह ने बताया कि बच्चों की पूरी मदद की जाएगी। उनकी देखभाल व भोजन आदि की व्यवस्था के लिए उन्हें बाल कल्याण केंद्र लखनऊ भेज दिया गया है। बच्चों की अन्य मदद भी कराई जाएगी।
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