फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हैदराबाद के प्रोफेसर ने मोदी को कुछ ऐसा कहा, जिससे बीबीएयू में मच गया बवाल

Fri, 15 Apr 2016 02:39 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रो. कांचा इलइया संगोष्ठी के दौरान भाषण देते हुए - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
डॉ. अंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर बीबीएयू में आयोजित संगोष्ठी के दौरान एक वक्ता के भाषण पर विवि के छात्र भड़क उठे। हैदराबाद के उस्मानिया विवि से आए प्रो. कांचा इलइया ने संगोष्ठी के दौरान खुले मंच से एक समूह विशेष पर निशाना साधा।
विज्ञापन


उन्होंने न सिर्फ देवी-देवताओं को भी अपनी टिप्पणियों में खींचा बल्कि यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान और बांग्लादेश भी भारत का हिस्सा होते तो दिल्ली में उच्च पदों पर मुसलमान, एससी, एसटी व ओबीसी बैठे होते। 

उन्होंने खुलेआम बीफ खाने का समर्थन करते हुएइसे न खाने वालों का मजाक बनाया। उन्होंने कहा कि हम बीफेरियंस थे, बीफ खाना भूले इसलिए दिमाग की क्षमता कम हुई और कई देशों से पिछड़ गए। 
विज्ञापन


प्रो. कांचा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी-कभी रोड पर सफाई करने लगते हैं। मैं कहता हूं खुद सफाई करने की जगह अरुण जेटली और अरुण शौरी से झाड़ू लगवाएं तो बात है। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी व ओबीसी को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए इंग्लिश में पढ़ना और लिखना सीखना जरूरी है। 

उन्होंने यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी आज अगर प्रधानमंत्री बने हैं तो डॉ. अंबेडकर के लिखे संविधान से। उन्होंने कहा कि देश के उच्च श्रेणी के लोगों को डॉ. अंबेडकर के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए।

प्रो. कांचा के इन वक्तव्यों के बाद विवि के प्रेक्षागृह में बैठे कुछ छात्र-छात्राएं भड़क उठे। एक छात्र ने कहा कि छात्र यह सोचकर संगोष्ठी में आए थे कि उन्हें वहां देश की अर्थव्यवस्था, डॉ. अंबेडकर केविचारों के बारे में बताया जाएगा। 
विज्ञापन

प्रो ने दी उच्च श्रेणी के लोगों को डॉ. अंबेडकर के बारे में पढ़ने की सलाह

पीएम नरेंद्र मोदी सफाई करते हुए - फोटो : demo pic
यहां वक्ता ने जिस तरह की टिप्पणी की है, उसमें एक समुदाय विशेष पर निशाना साधा गया। इस तरह की बातों से वह विवि के छात्रों को दो हिस्सों में बांटना चाहते हैं। वहीं एक छात्रा बोली कि वक्ता के अनुसार उच्च श्रेणी के लोगों को डॉ. अंबेडकर के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। 

लेकिन क्या लोअर कास्ट में सभी ने डॉ. अंबेडकर को पढ़ा और समझा है। कुछ समय के लिए इन चीजों से विवि का माहौल काफी गर्म हो गया। बीबीएयू के छठे दीक्षांत समारोह में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे तो उन्हें छात्रों द्वारा मुर्दाबाद के नारों का सामना करना पड़ा था।

उस मामले को लेकर सभी जगह विवि की फजीहत हुई थी। वहीं गुरुवार के कार्यक्रम में जब उस्मानिया विवि से आए वक्ता ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से सफाई कराने की बात कही तो प्रेक्षागृह में बैठे कुछ छात्रों ने अरुण जेटली मुर्दाबाद के नारे लगाए।

विवि में चल रही दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में जब कुलपति प्रो. आरसी सोबती पहुंचे तो उन्हें इस पूरे प्रकरण की जानकारी हो चुकी थी। उन्होंने मंच से कहा कि इस संगोष्ठी का आयोजन डॉ. अंबेडकर केविचारों को सभी तक पहुंचाने के लिए हुआ था। 

लेकिन यह जानकर दुख हुआ कि आयोजकों ने पूरे देश में सिर्फ साउथ से ही विशेषज्ञों को बुलाया। प्रो. सोबती ने कहा कि नॉर्थ, ईस्ट और वेस्ट में भी डॉ. अंबेडकर पर बोलने वालों की कमी नहीं है। बहुत से विशेषज्ञों ने उन पर शोध किए हैं। मालूम हो कि इस संगोष्ठी के आयोजन सचिव विवि केइकोनॉमिक्स विभाग के डॉ. एलसी मलईया थे।

बीबीएयू के प्रवक्ता प्रो. कमल जायसवाल प्रो. कांचा ने जो भी कहा उनकी व्यक्तिगत राय है। इससे विवि इत्तेफाक नहीं रखता। वीडियो मंगाकर मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी। ऐसे लोगों को विवि में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यदि वह दोषी पाए गए तो विवि मे प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें