लखनऊ में नगर निकाय की सीमा में स्थित सभी तरह की संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब इन संपत्तियों को ‘यूनिक प्रॉपर्टी पहचान’ (यूनिक आईडी) देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके लिए नगर विकास विभाग ने संपत्तियों को तीन श्रेणी में चिह्नित करके 17 अंकों की यूनिक आईडी देने की व्यवस्था बनाई है। इसमें आवासीय, अनावासीय और मिश्रित या अन्य श्रेणी की संपत्तियों को शामिल किया गया है।
दरअसल प्रापर्टी टैक्स ही नगर निकायों की आय का बड़ा जरिया है। लेकिन अधिकांश नगर निकायों में संपत्तियों का पूरा ब्योरा न होने से इस मद की शत-प्रतिशत वसूली नहीं हो पाती है। इससे प्रतिवर्ष नगर निकायों को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। साथ ही प्रापर्टी टैक्स के निर्धारण और वसूली में भी दिक्कतें आ रही हैं।
केंद्र सरकार ने ‘बिजिनेस रिर्फाम्स-2020’ के तहत प्रदेश में सभी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कराने का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। अब संपत्तियों को यूनिक आईडी दिए जाने की कार्यवाही शुरू की जानी है। प्रमुख सचिव नगर विकास ने सभी नगर निकायों को यूनिक आईडी के आवंटन की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं।