भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी के विरोधी ही नहीं शुभचिंतक भी परेशान हैं। इनकी जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है कि वाजपेयी जी आखिर अध्यक्ष कब बनेंगे?
दरअसल, वाजपेयी जी ठहरे सरल और खांटी कार्यकर्ता माफिक आदमी। इसलिए उनकी कोशिश यह होती है कि हर कार्यक्रम में वह मौजूद रहें। सिर्फ संघर्ष का निर्देश ही न दें बल्कि सड़कों पर भी संघर्ष में शामिल दिखें।
पर, वाजपेयी जी की यह सरलता उनके शुभचिंतकों की समस्या बन गई है। इनकी चिंता यह है कि वाजपेयी जी भाजपा जैसी बड़ी पार्टी के सबसे बड़े प्रदेश के अध्यक्ष हैं।
उनके अधीन तमाम संगठन हैं। ऐसे में अगर वह महिला मोर्चा से लेकर युवा मोर्चा और संगठनों के कार्यक्रमों में खुद ही नेतृत्व संभालने लगेंगे तो बाकी सब क्या करेंगे।
खुद वाजपेयी को भी वह वजन नहीं मिलेगा जो उत्तर प्रदेश के महत्व को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष को मिलना चाहिए। इसलिए शुभचिंतक भगवान से मना रहे हैं कि वाजपेयी जी बेशक अच्छे कार्यकर्ता हैं लेकिन वह अच्छे नेता भी बन जाएं।