शिक्षा मित्रों को दो वर्षीय पत्राचार बीटीसी प्रशिक्षण के बाद सहायक अध्यापक बनाने के लिए निदेशालय से भेजे गए निमयावली संशोधन संबंधी प्रस्ताव में कई खामियां हैं।
शासन ने निदेशालय से शीघ्र ही इसे संशोधित करते हुए भेजने का निर्देश दिया है।
शिक्षा मित्रों को टीईटी से छूट देने या फिर इसके विकल्पों पर भी चर्चा की गई।
राज्य सरकार लोकसभा चुनाव को देखते हुए शिक्षा मित्रों के विरोध से बचना चाहती है।
सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में इस संबंध में अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया गया।
पढ़ें-उर्दू की ये परीक्षा दिला सकती है पुरस्कार
उत्तर प्रदेश में 1.63 लाख शिक्षा मित्र प्राइमरी स्कूलों में लगे हुए हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद इन्हें दो वर्षीय पत्राचार बीटीसी प्रशिक्षण देकर शिक्षक बनाए जाने का निर्णय किया गया है।
पहले चरण में करीब 60,000 शिक्षा मित्रों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन्हें जनवरी 2014 में सहायक अध्यापक बनाया जाना है।
शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाने से पहले उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में संशोधन करते हुए उन्हें शिक्षक बनाए जाने का प्रावधान किया जाना है।
बेसिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा था।
सचिव बेसिक शिक्षा ने नियमावली पर चर्चा के लिए सोमवार को शासन के अधिकारियों के साथ निदेशालय व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों को बुलाया।
नियमावली पर विचार-विमर्श के दौरान इसमें कई खामियां मिलीं। इसे देखते हुए निदेशालय से शीघ्र ही संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
इसके अलावा शिक्षा मित्रों को टीईटी का विकल्प दिए जाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद और हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षक बनने के लिए टीईटी अनिवार्य है।
लखनऊ की अन्य खबरों के लिए देखें यहां