शहरों में तालाब व पोखरों की जमीन पर बने मकान तोड़े जाएंगे।
यही नहीं निकायों को ऐसे कितने मकान व अवैध कब्जे हटाए गए, इसकी जानकारी हर महीने पांच तारीख को निकाय निदेशालय को देनी होगी।
इसमें किसी तरह की लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई भी होगी।
राज्य में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, सूबे की आबादी 19 करोड़ 98 लाख 12 हजार 341 हो चुकी है।
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मगर इसका सर्वाधिक लाभ प्रापर्टी डीलरों व बिल्डरों ने ही उठाया। उन्होंने सरकारी जमीनों, तालाब, पोखरे और कब्रिस्तान तक की जमीनें बेच डाली।
इतना ही नहीं इन जमीनों पर रातोंरात मकान व इमारतें भी खड़ी कर दी गईं। हाईकोर्ट ने ऐसे कब्जों को गंभीरता लेते हुए अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दिया है।
यह है खेल
शहर का दायरा बढ़ने के साथ ग्राम समाज की जमीनें निकायों में शामिल हो गई हैं। ग्राम समाज की जमीनों पर तालाब, पोखरे, चारागाह और कब्रिस्तान हुआ करते थे।
निकायों में शामिल होने के बाद नगर निगम व पालिका परिषद के लेखपाल और तहसीलदारों ने इन जमीनों का प्रापर्टी डीलरों से सौदा किया।
प्रापर्टी डीलरों ने इन जमीनों को बेचा और इससे होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा अधिकारियों को भी दिया। यही कारण है कि शहरों के अधिकतर तालाब, पोखरे, चारागाहों पर मकान बन चुके हैं।
सरकारी संस्थाएं भी पीछे नहीं
ऐसा नहीं है कि केवल प्रापर्टी डीलरों ने ही तालाब, पोखरे और चारागाहों की जमीनों को बेचा है। सरकारी संस्थाओं ने भी इन पर कब्जा किया है।
नगर विकास विभाग को मिली सूचना के मुताबिक, कई शहरों में आवास विकास परिषद व विकास प्राधिकरणों ने तालाब, पोखरे, चारागाहों की जमीनों को बेचा है।
उदाहरण के लिए लखनऊ में ही विकास प्राधिकरण ने कई बिल्डरों को जमीनें बेची हैं।
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