तीन दशकों में सूबे में खिसक चुकी सियासी जमीन को हासिल करने के लिए कांग्रेस ने इस बार पूरा दम लगा दिया है। पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी किसान यात्रा के जरिये पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं तो अक्तूबर के पहले सप्ताह में राहुल की यात्रा पूरी होने के बाद नवंबर में प्रचार के दूसरे चरण में प्रियंका वाड्रा को लॉन्च करने की तैयारी है।
माना जा रहा है कि दादी इंदिरा गांधी के जन्मदिन 19 नवंबर को प्रियंका इलाहाबाद से प्रचार अभियान की कमान संभालेंगी।
नेहरू-गांधी परिवार के यूपी कनेक्शन को भुनाने तथा लोकल कनेक्ट के लिहाज से इस बार कांग्रेस ने इलाहाबाद के स्वराज भवन को चुनावी गतिविधियों का केंद्र बनाया है।
इलाहाबाद को केंद्र बनाने के पीछे पूर्वांचल व अवध पर खास फोकस रखने की मंशा है। सोनिया से राहुल तक स्वराज भवन पहुंचकर यह संदेश देने की कोशिश करते नजर आए हैं कि यूपी को ही वे अपना घर मानते हैं।
माहौल अनुकूल तो कराई जाएंगी सौ सभाएं
फिलहाल तो प्रदेश में प्रियंका की 50 सभाएं कराने का खाका तैयार किया गया है। अनुकूल माहौल नजर आने पर इन सभाओं की संख्या 100 तक पहुंच सकती है।
योजना कुछ ऐसी है कि करीब-करीब सभी जिलों में प्रियंका की कम से कम एक सभा जरूर हो जाए। प्रियंका के कैंपेन को अंतिम रूप राहुल की किसान यात्राओं की इम्पैक्ट रिपोर्ट तैयार हो जाने के बाद दिया जाएगा।
खोई सियासी ताकत हासिल करने के लिए कांग्रेस इस बार सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार दिखाई दे रही है। अभी राहुल ने मोर्चा संभाला है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही प्रियंका और सोनिया भी उनके साथ कदमताल करती नजर आएंगी।
वैसे सबकी निगाहें प्रियंका पर टिकी हैं। सब कुछ तैयार है। प्रियंका की लॉन्चिंग किस अंदाज में कराई जाए, यही तय होना अभी बाकी है।
दूसरे चरण की अगुवा होंगी प्रियंका
कांग्रेस के चुनाव प्रचार को धार देने के लिए प्रशांत किशोर नवंबर से प्रियंका को मैदान में उतारना चाहते हैं। शीर्ष नेताओं की मानें तो प्रियंका ने इसके लिए हामी भर दी है। राहुल की यात्रा के बाद पार्टी की जो भी रणनीति बनेगी वह प्रियंका के इर्द गिर्द ही केंद्रित रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर ने इसके लिए योजना भी बना ली है लेकिन अभी वह इसका खुलासा नहीं कर रहे हैं। प्रियंका के मैदान में उतरने के साथ ही कांग्रेस आक्रमक प्रचार अभियान छेड़ने के मूड में है।
जहां राहुल की यात्रा का इम्पैक्ट नहीं, प्रियंका वहां करेंगी सभा
जानकारों का कहना है कि किसान यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने अपनी टीम के जरिये हर जिले में राहुल की खाट सभाओं, जनसभाओं व लोगों से सीधे संवाद की इम्पैक्ट रिपोर्ट तैयार कराई है।
इन रिपोर्टों का विश्लेषण करने के बाद जिन क्षेत्रों में रिस्पांस बहुत अच्छा नहीं रहा, वहां प्रियंका की सभाएं कराने का फैसला किया जा सकता है। कोशिश है कि प्रियंका की सभाएं ऐसे क्षेत्रों में रखी जाएं, जिससे सभी जिलों के साथ-साथ अधिकांश विधानसभा क्षेत्र भी कवर हो सकें।
एक-दूसरे के साथ मंच शेयर नहीं करेंगे राहुल-प्रियंका
प्रशांत किशोर की रणनीति है कि प्रियंका और राहुल अलग-अलग प्रचार करेंगे। एक-दूसरे के साथ मंच कम ही शेयर करेंगे।
प्रियंका मुख्य रूप से गांधी परिवार के योगदान, दादी इंदिरा गांधी व पिता राजीव गांधी के यूपी से रिश्ते को रेखांकित करते हुए वोटरों से समर्थन मांगेंगी। दूसरी तरफ, राहुल केंद्र व राज्य सरकार पर हमलावर रहेंगे और एंटी एकेंबेंसी का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।
दादी जैसी प्रियंका... छवि भुनाने की कोशिश
प्रियंका को चुनाव अभियान में उतारने के पीछे कांग्रेस अपना फायदा भी देख रही है। आम लोगों को प्रियंका में उनकी दादी इंदिरा गांधी की छवि दिखती है। साथ ही हाजिर जवाब भी हैं।
प्रियंका विपक्ष के हमलों का सीधा और सटीक जवाब देने में माहिर हैं तो आम कांग्रेसियों को उनमें करिश्माई छवि भी नजर आती है।