यूं तो कांग्रेस के नेता बैठकों में काफी हमलावर रहते हैं। कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर वरिष्ठ नेताओं के सामने लड़ जाते हैं। लेकिन, शुक्रवार को वे काफी अनुशासित दिखे।
इसके पीछे की मंशा सिर्फ इतनी थी कि प्रियंका की नजरों में खराब छवि बनी तो फिर यूपी कांग्रेस में कभी महत्व नहीं पा सकेंगे। जिस तरह से यूपी की राजनीति में पार्टी प्रभावशाली हो रही है, उसमें देर-सबेर भाजपा का विकल्प बनकर कांग्रेस ही उभरेगी।
भाजपा भी इसे अपने लिए मुफीद मानती है। प्रियंका के ट्वीट या सीएम को पत्र लिखने के बाद आनन-फानन में कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।