प्रियंका की खास रणनीति है कि उनके किसी कदम से भाजपा को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण का मौका न मिले। यही वजह है कि वे बिजनौर में सीएए-एनआरसी मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान मारे गए दो मुस्लिम युवकों के परिवारीजनों और घायल हुए एक हिंदू युवक के परिवारीजनों से मिलने गईं। लेकिन, प्रेस कॉन्फ्रेंस हिंदू युवक (पिछड़ा वर्ग) के घर पर ही की, ताकि भाजपा को किसी और दिशा में प्रियंका के प्रयास को मोड़ने में सफलता न मिले।
इसी तरह से लखनऊ में भी वे दारापुरी (अनुसूचित जाति) की बीमार पत्नी से ही मिलने गईं। बाकी पीड़ित परिवारों से मिलने उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजा। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि भाजपा के रणनीतिकार भी प्रियंका को मीडिया में चर्चा मिलने को अपनी रणनीति की सफलता मान रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस के मजबूत होने से सपा-बसपा का वोट बंटेगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को ही मिलेगा।