प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि विश्वास के संकट से जूझ रही कांग्रेस पार्टी चुनाव में हार के बाद गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रही है। छपास रोग से ग्रसित कांग्रेस की महासचिव प्रियंका रॉबर्ट वाड्रा को रिसर्च का इतना ही शौक था, तो अमेठी और रायबरेली के गांव और मजरों पर सत्ता में काबिज होने के दौरान रिसर्च हो जाती तो लोगों को 70 साल तक इंतजार न करना पड़ता। इन जिलों के एक लाख से ज्यादा घरों का अंधेरा प्रदेश की भाजपा सरकार में दूर हुआ है।
कांग्रेस पार्टी को लोगों की इतनी ही परवाह होती तो दशकों सत्ता में बैठे होने के बाद भी देश के हर घर में बिजली पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत न पड़ती। उनके भीतर इतनी ही संवेदना होती तो इन घरों का अंधेरा कब का दूर हो चुका होता। देश के 2.63 करोड़ घरों को बिजली देने में विफल, अंधकार की प्रतीक भ्रष्ट कांग्रेस के नेतागण, भाजपा सरकार पर आरोप लगाने से पहले आत्मचिंतन करें।
अच्छा होता यदि वह सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालने से पहले गंभीरता दिखाते हुए एक बार वहां की वस्तुस्थिति जान लेती, तो विपरीत प्राकृतिक दशाओं के बाद भी विद्युत विभाग के कार्मिकों की क्रियाशीलता उन्हें अनुत्तरित कर देती। चुनी हुई तिथियों के साथ ही अन्य दिनों की भी विद्युत आपूर्ति की जानकारी जुटाती तो उन्हें प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की बेहतर स्थिति का अंदाजा हो जाता।
आंधी-पानी के विपरीत मौसम और पेड़ गिर जाने के बाद भी बहुत ही कम समय में इटावा और ललितपुर में विद्युत सप्लाई शुरू कर दी गई थी। अन्य स्थानों पर भी तकनीकी खामियों को मुद्दा बनाकर वह केवल अपनी हार की खीझ को ही दर्शा रही हैं।