लखनऊ। फोड़े के ऑपरेशन के बाद बच्चे की मौत के मामले में जांच कमेटी ने दुबग्गा स्थित न्यू वेदांता अस्पताल को दोषी ठहराया है। आरोप है कि कई नोटिस के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने बयान नहीं दर्ज कराया। नर्सिंग होम के नोडल का कहना है कि अस्पताल चलाने पर रोक लगाई जाएगी।
हरदोई के बेनीगंज निवासी किसान बैजनाथ मौर्या के बेटे प्रांजल (05) के सीने में फोड़ा था। परिजनों ने उसे कोथावां स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। एक जून को यहां से लखनऊ के न्यू वेदांता हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। उसी दिन दोपहर में बच्चे को भर्ती किया गया। ऑपरेशन के एक घंटे के भीतर बच्चे की मौत हो गई थी।
मां रुबी ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। पुलिस ने सीएमओ को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी के सदस्यों ने अस्पताल को कई नोटिस देकर बयान दर्ज कराने के साथ साक्ष्य मांगे थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने बयान दर्ज नहीं कराया। कमेटी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट व बच्चे के परिजनों की ओर से दिए साक्ष्य के आधार पर अस्पताल को दोषी ठहराया है। नर्सिंग होम के नोडल डॉ. एपी सिंह का का कहना है कि पुलिस को मामले की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
घटना के बाद न्यू वेदांता अस्पताल के संचालक शुभम यादव ने इसे संचालन के लिए दूसरे को दे दिया। नया संचालक उसी पते पर करीब एक वर्ष से अस्पताल चला रहा है। अफसरों को इसकी जानकारी होने के बाद भी अस्पताल संचालन पर रोक नहीं लगाई गई।