यूपीए शासनकाल में देश के दूसरे राज्यों में लागू की गई प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना अब सूबे में भी लागू होगी। इस योजना के केंद्र में दलित बहुल राजस्व ग्राम होंगे। केंद्र सरकार न सिर्फ इन गांवों के विकास के लिए अलग से बजट देगी बल्कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी इन्हें प्राथमिकता पर मिलेगा।
यूपी की सियासत में दलितों की अहम भूमिका और 2017 के चुनाव के लिहाज से मोदी सरकार की इस पहल को अहम माना जा रहा है। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि पीएम आदर्श ग्राम योजना यूपीए सरकार ने 2009-10 में शुरू की थी।
राजस्थान व बिहार जैसे राज्यों में यह योजना पहले से लागू है। केंद्र ने तब यूपी में इसे लागू नहीं किया। वह बताते हैं,हो सकता है कि केंद्र ने तब यह सोचकर योजना से किनारा कर लिया हो कि कहीं सूबे तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी बसपा नाराज न हो जाए। वजह, मायावती यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थीं।
दूसरा, मायावती अपने को दलितों की सबसे बड़ी नेता मानती हैं और यूपी उनकी सियासत का गढ़ है। सूबे में कोई दूसरा दलितों के लिए कुछ करने के लिए आगे बढ़ता है तो उन्हें उसमें सियासत नजर आती है। तब की केंद्र सरकार बसपा को नाराज कर ऐसा जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं थी। लेकिन मोदी सरकार के लिए ऐसी स्थिति नहीं है।