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हेड मास्साब को चाहिए सस्ता कपड़ा और टेलर

Mon, 18 Nov 2013 10:41 AM IST
दीप सिंह/लखनऊ
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प्राइमरी स्कूलों के हेडमास्टर बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा सस्ते कपड़े और टेलर को लेकर चिंतित हैं।
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दरअसल उन्हें बच्चों की यूनीफार्म खुद बनवानी है। दिक्कत यह है कि एक यूनीफार्म के लिए सरकार सिर्फ 200 रुपये दे रही है। उसमें भी शर्त है कि क्वालिटी बेहतर हो।

हेड मास्साब की चिंता यह है कि यूनीफार्म के लिए अच्छी क्वालिटी का कपड़ा और सिलाई का खर्च महज 200 रुपये में कैसे समेटें। कई जगह तो ड्रेस की सिलाई के ही 125 रुपये मांग रहे हैं।
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ऊपर से सरकार 150 रुपये तो दे रही है लेकिन बाकी के 50 रुपये क्वालिटी चेक करने के बाद मुहैया कराएगी।
इस साल पहली बार बच्चों को नीली की जगह खाकी यूनीफार्म दी जानी है।

हर बच्चे को दो यूनीफार्म दी जाएगी। इसके लिए 400 रुपये दिए जाएंगे। यानी एक यूनीफार्म 200 रुपए में सिलवानी है। नई यूनीफार्म और विद्यालय प्रबंधन समितियों के गठन के फेर में विद्यालयों को पैसा आधा सत्र बीत जाने के बाद मिला।

इसमें भी पहली किश्त में प्रति यूनीफॉर्म 150 रुपए के हिसाब से राशि मिली है। बाकी के 50 रुपए जिला स्तरीय कमेटी की क्वालिटी जांच के बाद दिया जाएगा।

शिक्षक पढ़ाए या यूनीफार्म के लिए कोटेशन तैयार करे
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ लखनऊ के नगर अध्यक्ष खलील उल्लाह और प्राथमिक विद्यालय चिकमंडी के हेडमास्टर कहते हैं कि सिर्फ 200 रुपए में अच्छा कपड़ा खरीदकर और टेलर से सिलवाकर तो बच्चों को यूनीफॉर्म नहीं दी जा सकतीं।

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तीन-फर्मों से कोटेशन लेकर सबसे सस्ती और अच्छी यूनीफार्म सिलवाने का झंझट भी बड़ी मुसीबत है। अब शिक्षक पढ़ाए या यही करता रहे। सरकार को चाहिए कि जिला स्तर पर खुद ही टेंडर करवाकर यूनीफार्म उपलब्ध करवा दे।

जुगाड़ में जुटे
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रांतीय संगठन मंत्री और प्राथमिक विद्यालय वान की गढ़ी, बिजनौर के हेडमास्टर नव बहार कहते हैं कि एक टेलर ने एक ड्रेस की सिलाई ही 125 रुपए बताई।

अब 75 रुपए में पैंट और शर्ट का क्वालिटी वाला कौन सा कपड़ा मिल जाएगा। हम बाजार से सिली हुई यूनीफार्म तलाश रहे हैं। उसमें भी 50 रुपए बाद में देने के लिए बहुत मुश्किल से एक व्यवसायी को राजी किया है।

कमीशन का भी खेल
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षिक स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय सिंह कहते हैं कि ज्यादातर सस्ता और घटिया किस्म की यूनीफार्म कुछ शहरों की मंडियों में बिकती हैं।
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200 रुपये में तो वहीं से यूनीफार्म खरीदी जा सकती है। कोटेशन और क्वालिटी चेक भी महज खानापूरी है। हकीकत तो यह है कि ये 200 रुपए भी पूरे नहीं मिलते। इसमें भी कमीशन होता है।

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