कार्तिक पूर्णिमा से डालीगंज पुल पर लगने वाला मेला रविवार को दिन भर तमाम झमेलों में पड़ा रहा। दुकानदार अनुमति के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे।
सांसद लालजी टंडन से फरियाद करते रहे। इस बीच महापौर को भी दुखड़ा सुनाया गया। इस पर जनप्रतिनिधियों ने डीएम से वार्ता की। नतीजा शाम होने तक प्रशासन की ओर से ‘सीमित दायरे में अनुमति’ की हरी झंडी मिल गई।
देर शाम तक स्थानीय दुकानदारों की करीब सौ छोटी दुकानों ने पुलिसिया मौजूदगी में आसपास के फुटपाथों पर अपनी दुकानें सजाई।
रविवार को छुट्टी का दिन होने के चलते मेले में उमड़े शहरियों ने सुबह की टूटी परंपरा में भीड़भाड़ से रौनक बढ़ाई। दुकानदारों की मानें तो मेला सोमवार से अपनी रंगत पकड़ेगा।
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सुरक्षा कारणों के चलते मेला लगाने का अनुमति नहीं मिली थी, लेकिन नहान के दिन दुकानदारों का सब्र टूट गया और एकजुट होकर सांसद लालजी टंडन से मुलाकात की। दुकानदार लंबूराम ने सांसद को पूरा दुखड़ा सुनाया।
इस सांसद ने डीएम से बात की। उधर, चौक के कन्वेंशन सेंटर में एक आयोजन में शामिल होने जा रहे महापौर डॉ. दिनेश शर्मा जब डालीगंज पुल से गुजरे तो दुकानदारों ने उन्हें अपनी व्यथा सुनाई।
इस पर महापौर ने वहीं से डीएम अनुराग यादव को फोन कर पूरे मामले की जानकारी ली।
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इसके बाद डीएम से मिली मौखिक अनुमति के बाद डालीगंज, पुराने लखनऊ, मनकामेश्वर वार्ड, सदर, राजाजीपुरम समेत स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगानी शुरू की।
हालांकि असमंजस के चलते आगरा, खुर्जा, बनारस, मिर्जापुर से आए तमाम दुकानदारों ने रात तक अपने सामानों के बंडल नहीं खोले थे। मेरठ से आए झूला कारोबारी तेज वीर ने देर शाम झूले कसने का काम शुरू कर दिया था।