लोकायुक्त की जांच में दोषी पाए गए मायावती सरकार के मंत्रियों पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है। राज्य सरकार द्वारा सिफारिशों पर पूरी तरह से अमल होने से असंतुष्ट लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने राज्यपाल को पांच पूर्व मंत्रियों की विशेष रिपोर्ट भेजकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगने का अनुरोध किया है।
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राज्यपाल राम नाईक ने विशेष रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर पूछा है कि सिफारिशों पर कार्रवाई करके लोकायुक्त को अनुपालन रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई? लोकायुक्त की रिपोर्टों को लेकर राजभवन की सक्रियता के बाद शासन हरकत में आ गया है।
लोकायुक्त की ओर से मुख्यमंत्री को भेजी गई सभी पूर्व मंत्रियों की रिपोर्ट निकलवाकर ब्यौरा तैयार कराया जा रहा है कि किन सिफारिशों पर अमल हुआ और किन पर नहीं? इसके बाद राज्यपाल को स्पष्टीकरण भेजा जाएगा।
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लोकायुक्त ने मायावती सरकार के करीब एक दर्जन मंत्रियों के खिलाफ दाखिल शिकायतों की जांच करके अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी है।
मायावती सरकार के एक दर्जन मंत्री ये
इनमें राजेश त्रिपाठी, अवध पाल सिंह यादव, रंगनाथ मिश्र, बादशाह सिंह, रतन लाल अहिरवार, चंद्रदेव राम यादव, फतेह बहादुर सिंह, सदल प्रसाद, राकेश धर त्रिपाठी, अयोध्या प्रसाद पाल, रामवीर उपाध्याय, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबूसिंह कुशवाहा, रामअचल राजभर आदि शामिल हैं।
लोकायुक्त की रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अपने आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों की छुट्टी तो कर दी थी लेकिन आपराधिक मामलों में जांच कराकर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। नसीमुद्दीन सिद्दीकी की जांच रिपोर्ट तो मायावती ने स्वीकार ही नहीं की।
सपा सरकार आने के बाद लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नसीमुद्दीन, रामवीर उपाध्याय, अयोध्या प्रसाद पाल, रामअचल राजभर की जांच रिपोर्ट भेजी लेकिन इन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार के इस रवैये से खफा लोकायुक्त ने अपनी सिफारिशों पर अमल कराने के लिए अब राजभवन में दस्तक दी है।
दिलचस्प यह है पूर्व मंत्रियों के बारे में लोकायुक्त की कुछ सिफारिशें लगभग चार साल से शासन में धूल खा रही हैं। अपने चुनाव घोषणापत्र में भ्रष्टाचार खत्म करने और लोकायुक्त प्रशासन को और मजबूत करने का वादा करने वाली सपा सरकार तो लोकायुक्त की सिफारिशों पर कुंडली मारकर ही बैठ गई है।
मंत्रियों का ब्यौरा तैयार कर रही सपा सरकार
लोकायुक्त ने हाल ही में अवध पाल सिंह यादव, रामवीर उपाध्याय, बादशाह सिंह, राजेश त्रिपाठी व राम अचल राजभर के बारे में राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेजी है। राज्यपाल ने इसका संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूछा है कि सिफारिशों पर अभी तक कार्रवाई करके लोकायुक्त को अनुपालन रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई?
राजभवन के सूत्रों का कहना है कि सरकार की तरफ से संतोषजनक जवाब न मिलने पर राज्यपाल इन रिपोर्टों को स्पष्टीकरण के साथ विधानमंडल के पटल पर रखने का आदेश दे सकते हैं।
राजभवन की सक्रियता से शासन में खलबली लोकायुक्त की रिपोर्टों पर राजभवन की सक्रियता के बाद शासन में खलबली मच गई है। राज्यपाल का पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय में पूर्व मंत्रियों के बारे में लोकायुक्त द्वारा भेजी गई रिपोर्टों को निकलवाकर ब्यौरा तैयार कराया जा रहा है कि किन सिफारिशों पर अमल हुआ और किन पर नहीं?
लोकायुक्त ने जिन विभागों से संबंधित सिफारिशें की हैं, उनसे भी जवाब तलब किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि लोकायुक्त की सारी रिपोर्टों का परीक्षण कराने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को जवाब भेजकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी जाएगी।
1- अवधपाल सिंह ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जा दलितों व अन्य लोगों की जमीन पर अवैध कब्जा मंत्री रहते हुए सगे-संबंधियों को ठेका दिलाना विभागीय मंत्री के रूप में कार्यों में अनियमितता कच्ची शराब बनाने वालों को संरक्षण समेत अन्य आरोप
2- रामवीर उपाध्याय रिश्तेदारों-करीबियों को पीडब्ल्यूडी के ठेके दिलाना विधायक निधि का दुरुपयोग आय से अधिक संपत्ति अर्जित करना गलत ढंग से जमीन का भू-उपयोग बदलवाना
3- बादशाह सिंह मंत्री पद का दुरुपयोग जमीन पर अवैध कब्जा विद्यालय की मान्यता लेने में धांधली
4- राजेश त्रिपाठी नारकोटिक्स की जमीन पर अवैध कब्जा करके कमाई करना मुक्तिपथ ट्रस्ट द्वारा घाट पर शवदाह के लिए पैसा वसूलना अवैध कब्जे की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाना
5- रामअचल राजभर भ्रष्टाचार व आय से अधिक संपत्ति अर्जित करना पद का दुरुपयोग व मनी लॉन्ड्रिंग परिवारीजनों के नाम आय से ज्यादा धन निवेश ट्रस्ट की आय का ज्ञात स्रोत नहीं मनचाही कंपनी को परिवहन निगम से ठेका दिलाना