निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए हैं।
यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में आयोजित प्रेसवार्ता में अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन, कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल और पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से यह मांग की।
तीनों संगठनों से लखनऊ समेत सीतापुर, बाराबंकी, शाहजहांपुर, मेरठ, हरदोई, अलीगढ़, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, फैजाबाद, प्रयागराज, जौनपुर, कानपुर, वाराणसी, सहारनपुर समेत कई जिलों के निजी स्कूल जुड़े हैं। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में सरकार ने मंथली फीस लेने का आदेश दिया था।
साथ ही इस सत्र में फीस की वृद्धि न करने और लॉकडाउन के दौरान ट्रांसपोर्ट फीस न लेने का भी आदेश दिया था। निजी स्कूल उसी आदेश के अनुसार फीस मांग रहे हैं। अभी तक मुश्किल से करीब 30 प्रतिशत फीस ही स्कूलों में जमा हो पाई है। निजी स्कूलों के संगठन की तरफ से डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से मांग है कि वे स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में अभिभावकों को स्पष्ट निर्देश दें। जो लोग वाकई में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वे स्कूलों को लिखकर दे सकते हैं। उनकी मंथली फीस बाद में समायोजित कर दी जाएगी।