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गैंगरेप: हरकतें क्यों करने लगी यूपी पुलिस?

Mon, 21 Jul 2014 09:31 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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...सवाल पर सवाल और जवाब के नाम पर खामोशी। अचरज भरे चेहरे। कंधे उचकाते और एक-दूसरे को माइक थमाते अफसर। कुछ ऐसी रही मोहनलालगंज खुलासे की प्रेस कांफ्रेंस।
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अफसरों के पास मीडिया के सवालों का सीधा जवाब नहीं था। एडीजी सुतापा सान्याल भी कई सवालों से बचती रहीं। उन्होंने ‘ऑन कैमरा नहीं बता पाएंगे’ कहकर पल्ला झाड़ लिया। पूरी प्रेस कांफ्रेंस अस्त-व्यस्त रही।

मोहनलालगंज कांड के खुलासे की प्रेस कांफ्रेंस रविवार शाम चार बजे थी। पुलिस लाइंस के सभागार में साढ़े तीन बजे से ही मीडियाकर्मियों की आमद शुरू हो गई। चार बजते-बजते सभागार खचाखच भर चुका था।
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ये रहे एडीजी के जवाब

चार बजकर कुछ मिनट पर आईजी कानून व्यवस्था अमरेंद्र सिंह सेंगर सादे कपड़ों में पहुंचे और मंच पर सबसे किनारे वाली कुर्सी पर बैठ गए। कुछ ही मिनट बाद एडीजी सुतापा सान्याल, आईजी सुभाष चंद्र, डीआईजी नवनीत सिकेरा और एसएसपी प्रवीण कुमार आए।

एडीजी ने माइक संभालते ही प्रेस नोट पढ़कर सुनाया। एडीजी ने कहा कि सिक्योरिटी गार्ड की गिरफ्तारी से स्पष्ट हो गया है कि महिला से गैंगरेप नहीं हुआ।

सवाल-जवाब का दौर शुरू हुआ तो पुलिस लाइंस का सभागार मछली बाजार बन गया। पहला सवाल आया। ...मैडम, कैसे पता चला कि राम सेवक ने वारदात की है? एडीजी बोलीं कि मोबाइल की कॉल डिटेल से इसकी जानकारी मिली।

...क्या एक आदमी इतनी वीभत्स और हैवानियत भरी वारदात कर सकता है? एडीजी ने कहा कि राम सेवक ने कुबूल किया, लेकिन हमें यकीन नहीं हुआ। काफी छानबीन के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि राम सेवक अकेले था। एडीजी ने कहा कि पुलिस के पास इसके पर्याप्त साक्ष्य हैं।

करते रहे बचकर निकलने की कोशिश

इसी बीच इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों ने सवालों की झड़ी लगा दी। एडीजी को कहना पड़ा कि एक-एक करके सवाल पूछें। हालांकि, मीडियाकर्मी शांत नहीं हुए।

शोरगुल के बीच सवाल उछला, पुलिस के पास क्या आधार हैं कि गैंगरेप नहीं हुआ? एडीजी ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि कई और रिपोर्ट आनी हैं जिसे चार्जशीट में शामिल किया जाएगा। सवाल जैसे-जैसे गंभीर होते गए अफसर बैकफुट पर आते रहे।

राजीव कौन है? यह सवाल आया तो एडीजी ने कंधे उचकाते हुए माइक एसएसपी की तरफ बढ़ा दिया।
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खामोश बैठे रहे आईजी

एसएसपी भी इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि इस बारे में छानबीन की जा रही है। राम सेवक जिस सिमकार्ड से महिला से बातें करता था, क्या उसकी चोरी की एफआईआर दर्ज थी?

इस सवाल पर भी एडीजी ने माइक एसएसपी को थमा दिया। महिला को पहली कॉल कब की गई और उसका मोबाइल फोन कब स्विच ऑफ हुआ?

महिला के घर से निकलने और उसके साथ हैवानियत होने तक के घटनाक्रम के बाबत पूछने पर एडीजी ने माइक डीआईजी की तरफ बढ़ा दिया। करीब एक घंटे चली प्रेस कांफ्रेंस के दौरान आईजी सुभाष चंद्र खामोश बैठकर इधर-उधर ताकते रहे जबकि डीआईजी-एसएसपी पसीना पोंछते रहे।

पत्रकारों के सवालों के कई जवाब अफसरों के पास नहीं थे तो कई जवाब घुमा-फिरा कर दिए गए।
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