रायबरेली। बकुलाही झील का अभिशाप रोहनिया के सैकड़ों किसानों की जिंदगी पर भारी पड़ गया है। किसानों की खेतिहर जमीन ऊसर हो गई है। कई गांवों में दिव्यांगता ने पैर पसार दिए हैं। कई बार झील की सफाई के लिए कदम उठे, लेकिन नतीजा सिफर रहा। एक बार फिर झील की सफाई के लिए योजना बनाई गई है। मंगलवार को ऊंचाहार विधायक झील की सफाई के कार्य का शुभारंभ करेंगे।
बकुलाही झील पहले नदी थी। इसका वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है। 40 साल से नदी का पानी अवरुद्ध हो गया और जलकुंभी ने जगह बना ली। उसकेे बाद नदी झील में तब्दील हो गई। हालत यह है कि रोहनिया ब्लॉक क्षेत्र के 35 गांवों के दस हजार किसानों की करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि झील के पानी का शिकार है। सीपेज होने से खेती नहीं होती है। फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण लोग दिव्यांग होते जा रहे हैं।
रोहनिया ब्लाक के उधवामऊ, पूरे ननकू, रोहनिया क्षेत्र के उमरन, भखरी, पावरगंज, रायपुर, गौसपुर, रोहनिया, दिग्पालपुर, उसरैना, पूरे ठकुराइन, लोहरा, सुमेर बाग, बेहरामपुर, पूरे सीतला बक्स, पूरे बासी, पूरे बल्दू, खीली का पुरवा, अंतरी का पुरवा, भवानी दीनपुर, मसौदा बाद, धौरहरा, धनेही गांव के किसान अधिक प्रभावित हैं।
2009 में सोनिया गांधी ने पास कराया था पैसा
2009 में झील की सफाई के लिए तत्कालीन सांसद सोनिया गांधी ने 109 करोड़ रुपये पास कराए थे, लेकिन झील की सफाई नहीं हो सकी। इसके बाद ऊंचाहार विधायक डॉ मनोज कुमार पांडेय ने सात बार झील की सफाई को लेकर विधानसभा में सवाल उठाया। इस पर 2016 में झील की सफाई के लिए पैसा पास हुआ, लेकिन मशीन में तकनीकी दिक्कत आ गई और काम बंद हो गया।
इसके बाद विधायक ने लोकलेखा समिति में मामले को उठाया, जिस पर झील की सफाई को लेकर योजना बनाई गई। कुछ दिन पहले विधायक ने प्रतापगढ़ के सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर झील का मुआयना भी किया था।