कमलरानी ने बताया कि पॉलीटेक्निक संस्थाओं में 2019-20 की परीक्षाओं के लिए द्वितीय, चतुर्थ तथा अंतिम सेमेस्टर (सेमेस्टर प्रणाली) प्रथम वर्ष एवं अंतिम वर्ष (वार्षिक प्रणाली) की 17 अगस्त से 5 सितंबर के बीच फेस टू फेस अध्यापन कार्य कराकर शेष पाठ्य चर्चा को पूर्ण कराया जायेगा।
प्रयोगात्मक परीक्षाएं 1 से 5 सितंबर के बीच आंतरिक मूल्यांकन से होंगी और 30 सितंबर तक परिणाम घोषित किए जाएंगे। द्वितीय तथा चतुर्थ सेमेस्टर की शेष सेशनल परीक्षा तथा असाइनमेंट 17 अगस्त से 5 सितंबर के बीच कराकर आंतरिक मूल्यांकन किया जायेगा।
प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर में घोषित परीक्षाफल के 50 प्रतिशत अंकों को कैरीओवर कर समस्त विषयों के अंक प्रदान करते हुए छात्रों को अगले शैक्षणिक वर्ष में प्रोन्नत किया जायेगा। तृतीय तथा अंतिम वर्ष का अध्यापन कार्य 15 सितंबर से शुरू होगा। 31 जुलाई तक प्रोजेक्ट संबंधी कार्य ऑनलाइन किए जाएंगे। 1 से 5 अगस्त के बीच आंतरिक मूल्यांकन और 6 से 14 अगस्त के बीच वाह्य मूल्यांकन पूरा कराया जायेगा।
सरकार ने विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों की परीक्षाओं को लेकर बीते एक महीने से चल रही ऊहापोह की स्थिति गुरुवार को स्पष्ट कर दी है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने राज्य विश्वविद्यालयों को कोरोना संक्रमण के मद्देनजर विवि का सत्र नियमित रखने और विद्यार्थियों के भविष्य एवं आवश्यकता को ध्यान में रखकर परीक्षा कार्यक्रम और अपनी कार्य योजना 23 जुलाई तक शासन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रथम वर्ष व द्वितीय सेमेस्टर के लिए विकल्प दिए
- प्रथम वर्ष के छात्रों के परिणाम यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार शत प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर घोषित किए जाएंगे।
- सभी संकायों के स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के ऐसे विद्यार्थी जिन्हें बिना परीक्षा के प्रोन्नत किया जाएगा वे 2020-21 की द्वितीय वर्ष की परीक्षा में शामिल होंगे। यदि ये सभी विषयों में अलग-अलग उतीर्ण हैं तो द्वितीय वर्ष के सभी विषयों के प्राप्तांक के औसत अंक ही उन्हें दिए जाएंगे।
- सभी संकायों के द्वितीय सेमेस्टर के प्रोन्नत होने वाले विद्यार्थियों को उनके प्रथम सेमेस्टर दिसंबर, 2019 के समस्त विषयों के प्राप्तांकों के औसत अंक दिए जाएंगे।
- यदि 2021 में द्वितीय वर्ष या चतुर्थ सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने पर जो विद्यार्थी कुछ विषयों में अलग-अलग उत्तीर्ण होकर बैक पेपर या इम्प्रूवमेंट परीक्षा के लिए योग्य घोषित किए जाते हैं तो उस विद्यार्थी की ओर से उतीर्ण सभी विषयों के प्राप्तांक का औसत अंक ही उसके प्रथम वर्ष या द्वितीय सेमेस्टर का प्राप्तांक माना जाएगा।
- यदि कोई विद्यार्थी 2021 में द्वितीय वर्ष की परीक्षा में फेल होता है तो वह 2022 में इस परीक्षा में पुन: शामिल हो सकेगा। 2022 की परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही उसे 2020 की परीक्षा के प्राप्तांक निर्धारित किए जाएंगे।
तीन, चार और पांच वर्षीय पाठ्यक्रम के
लिए भी दिए गए दो विकल्प
- इंटरमीडिएट में छात्रों की सेमेस्टर व वार्षिक परीक्षाओं का परिणाम 50% गत परीक्षा परिणाम और 50% आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर घोषित किया जाए।
- सभी संकायों के द्वितीय वर्ष व चतुर्थ सेमेस्टर के ऐसे विद्यार्थी जो तृतीय वर्ष या पंचम सेमेस्टर में प्रोन्नत होंगे वे प्रथम वर्ष (2019), प्रथम-तृतीय (सभी तीन) सेमेस्टर के विषयों के प्राप्तांकों का औसत अंक (द्वितीय वर्ष-2020), चतुर्थ सेमेस्टर (2020) का प्राप्तांक माना जाएगा। यह उनके लिए हैं, जिनकी परीक्षाएं नहीं हो सकी हैं।
विश्वविद्यालयों को छूट
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय शासन की ओर से निर्धारित विकल्पों पर विचार कर अपनी परिस्थिति के अनुसार उचित निर्णय ले सकेंगे। अन्य सभी पारंपरिक पाठ्यक्रम, जिनमें कुल अवधि तीन वर्ष व छह सेमेस्टर से अधिक हो, उनमें भी विश्वविद्यालयों के स्तर पर इसी व्यवस्था के आधार पर क्रियान्वयन किया जाएगा।
अंक सुधार का मौका मिलेगा
2020 के परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट होने वाले स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष सहित सभी वर्षों के विद्यार्थी 2021 में बैक पेपर परीक्षा और 2021-22 में वार्षिक या सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होकर अंकों में सुधार कर सकते हैं।
इंजीनियरिंग और प्रबंधन के लिए अलग से जारी होंगे आदेश
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था विश्वविद्यालयों के कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि एवं कृषि विषय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए है। इंजीनियरिंग और प्रबंधन के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से निर्देश जारी किए जाएंगे।