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Lucknow News: संगत को सुनाई गुरुग्रंथ साहिब की कथा

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साभार इंटरनेट
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सदर गुुरुद्वारा में रविवार को श्री गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया। ज्ञानी हरविंदर सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब का इतिहास कथा के माध्यम से संगत के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 1604 में श्री गुरुग्रंथ साहिब का कलमबंद करने का कार्य गुरदास जी ने किया था। गुरु अर्जनदेव ने पांच गुरुओं, भक्तों और भट्टों की वाणी को 30 रागों में संग्रहित कर पोथी साहिब के रूप में स्थापित कर गुरुद्वारा हरमिंदर साहिब अमृतसर में बाबा बुड्डा जी को पहला ग्रंथी मनोनीत किया था।
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गुरुद्वारे की हजूरी रागी प्रीतम सिंह और सहयोगियों ने भी संगत को निहाल किया। लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरपाल सिंह जग्गी ने कहा कि भारत के संविधान के अनुसार साहिब गुरुग्रंथ साहिब को जीवित गुरु के रूप में स्वीकारा गया है। श्री गुरु गोविंद सिंह के पिता महाराज जी ने 1708 में नौवें गुरु तेगबहादुर की वाणी को जै जै वंती राग में समाहित कर 11वें गुरु के रूप स्थापित किया। इस के बाद दैहिक गुरु की प्रथा को समाप्त कर दिया गया। आज संपूर्ण ग्रंथ साहिब 31 रागों में दर्ज है। आज के दिन को ग्रंथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। सरदार तेजपाल सिंह रोमी ने बताया कि इस अवसर पर चरणजीत कौर गांधी को उप महापौर बनने पर सम्मानित किया गया। सरदार इंदर सिंह ने बताया कि दीवान के उपरांत संगतों को गुरु का लंगर वितरित किया गया।
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