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यहां जेल के नाम पर रसूखदार हो जाते हैं बीमार

Thu, 19 Dec 2013 10:27 AM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
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कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने के बाद भड़काऊ बयान देकर लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोपी बसपा सांसद कादिर राणा के खिलाफ तमाम गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।
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तीन महीने बाद कादिर राणा ने कोर्ट में समर्पण किया और इसके तुरंत बाद उनकी तबियत नासाज हो गई। उन्हें जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

जेल जाते ही तबियत खराब होने और फौरन जेल के बजाय अस्पताल में आराम करने का मौका मिलने का बसपा सांसद कादिर राणा का मामला कोई पहला केस नहीं है।

एक अरसे से यह व्यवस्था सी बन गई है कि रसूखदार लोगों को जब जेल जाना पड़ता है तो वह सामान्य कैदी के बजाय वीआईपी ट्रीटमेंट हासिल करने के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं।
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इसमें ऊपर की सहमति तो होती ही है, जेल प्रशासन व चिकित्सकों का भी पूरा सहयोग मिलता है। तरीका भी बेहद आसान है।

सीने में दर्द की मामूली सी शिकायत और जेल अस्पताल के डॉक्टर द्वारा फौरन विस्तृत जांच व बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल या किसी विशेषज्ञता वाले अस्पताल में ले जाने की सिफारिश।

रसूखदारों के लिए जेल डॉक्टर से अपने पक्ष में इस तरह की चिकित्सीय सलाह लिखवाना कोई मुश्किल काम नहीं है।

कई बार सत्ता में ऊपर बैठे लोगों का इशारा मिलने पर तो कई बार अपने रसूख के दम पर ऐसे लोग अपनी इस कोशिश में कामयाब हो जाते हैं।

जेल प्रशासन के पास भी बहाना होता है जेल अस्पतालों में गहन परीक्षण के लिए उपकरण और सुविधा न होने का। जिला कारागार का चिकित्सक बेहतर सुविधा वाले अस्पताल में इलाज के लिए भेजे जाने की संस्तुति कर देता है। संस्तुति के बाद सलाह पर अमल जरूरी होता है।

कादिर राणा तो जेल जाते ही अस्पताल पहुंच गए। जबकि कई अन्य को इसके लिए मशक्कत करनी पड़ती है।

पूर्व में मधुमिता हत्याकांड के आरोप में फंसे तत्कालीन मंत्री अमरमणि त्रिपाठी भी अपने कारागार प्रवास के दौरान कई बार बीमार होकर अस्पताल पहुंचे।

लैकफेड घोटाले में गिरफ्तार हुए पूर्व श्रम मंत्री बादशाह सिंह की भी तबियत खराब हुई तो पूर्व में जेल जाने वाले कई अन्य रसूखदारों के नाम भी इससे जुड़े।

सपा विधायक विजय मिश्रा भी सत्र के दौरान जेल से आकर अस्पताल में ठहरे। वह तो सत्र की समाप्ति के बाद भी अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में काबिज रहे।

अस्पताल के डाक्टरों ने जब उन्हें साफ तौर पर कह दिया कि वह पूरी तरह ठीक हैं तभी उन्होंने अस्पताल छोड़ा था।

कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के आवास पर आगजनी व तोड़फोड़ के आरोपी और बसपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री इंतिजार आब्दी को पुलिस ने बचाने की कोशिश की। पर मामला तूल पकड़ने पर पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा।

इस मामले में जब उन्हें जेल जाना पड़ा तो उनकी भी तबियत बिगड़ गई और बलरामपुर अस्पताल में दाखिल कराया गया।

वहीं, एनआरएचएम घोटाले में जेल जाने वाले प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को भी अपने प्रशासनिक समीकरणों के साथ ही पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के प्रभाव से अस्पताल में दाखिल होने की छूट मिल गई। शुक्ला पिछले दिनों जमानत मिलने पर जेल से बाहर आ चुके हैं।
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