उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी के चलते बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई है। एक ओर बिजली मांग में भारी इजाफा होने और दूसरी ओर ट्रांसफार्मर फुंकने, लोकल फाल्ट व अन्य तकनीकी कारणों से भी आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। बिजलीघरों की कई इकाइयों के बंद होने से उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।
प्रदेश में बिजली की मांग 25,000 मेगावाट से ऊपर बनी हुई है जबकि सप्लाई 23,000-23,500 मेगावाट के बीच है। बारा, मेजा और ललितपुर बिजलीघर की 660-660 मेगावाट क्षमता की एक-एक इकाई के बंद हैं। हालांकि ललितपुर की इकाई बुधवार को चालू कर दी गई, लेकिन बारा और मेजा की इकाइयां अभी बंद हैं। इसके अलावा रिहंद की 500 मेगावाट और ओबरा की 200 मेगावाट क्षमता की एक-एक इकाई के बंद होने से उपलब्धता में कमी हुई है।
प्रदेश में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए अन्य स्रोतों से इंतजाम के साथ ही एनर्जी एक्सचेंज से 3500 मेगावाट तक बिजली खरीदी जा रही है। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) के अधिकारियों का कहना है कि प्रचंड गर्मी की वजह से बिजली की रिकॉर्ड मांग बनी हुई है। रोजाना 30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद लोगों को शिड्यूल के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है।
इसकी वजह से गांवों में अंधाधुंध बिजली कटौती हो रही है तो शहरों में लो वोल्टेज, लोकल फाल्ट व अन्य तकनीकी कारणों से हालात बदतर हैं। लखनऊ के ही तमाम इलाकों में बिजली की आंखमिचौली ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। वहीं अघोषित बिजली कटौती से प्रदेश भर में उद्योग-धंधों पर असर पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बारिश नहीं होती, तब तक बिजली संकट से निजात के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
बिजली की मांग को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे लोगों को शिड्यूल के अनुसार बिजली मिले और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
-एम. देवराज, अध्यक्ष, उप्र पावर कॉर्पोरेशन
एसएलडीसी के मुताबिक कहां किस श्रेणी में कितनी आपूर्ति
श्रेणी शिड्यूल आपूर्ति
ग्रामीण 18:00 9:96
तहसील 21:30 15:20
बुंदेलखंड 20:00 11:46
जिला 24:00 24:00
मंडल 24:00 24:00
महानगर 24:00 24:00
उद्योग 24:00 24:00
(नोट : शिड्यूल व आपूर्ति घंटे में)