पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने होली के मौके पर पूरे प्रदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कटौतीमुक्त बिजली आपूर्ति की तैयारी की है। क्षेत्रीय नियंत्रण कक्षों को 5 मार्च को शाम से छह मार्च आधी रात के बाद तक यथासंभव बिजली की कटौती न करने के निर्देश भेजे गए हैं।
यह भी तय किया गया है होली पर बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बिजली नहीं खरीदी जाएगी। बारिश की वजह से बिजली की मांग में कमी होने के बाद से बिजलीघरों में कराई जा रही थर्मल बैकिंग को समाप्त कराकर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी।
शक्ति भवन में मंगलवार को आला अफसरों की बैठक में होली के मौके पर आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने पर मंथन हुआ। नियंत्रण कक्ष अधिकारियों ने बताया कि इस बार होली पर अधिकतम मांग 11,500 मेगावाट के आसपास रहने का अनुमान लगाया गया है।
6 मार्च के बाद लगातार मिलेगी बिजली
मौजूदा समय में राज्य के ताप बिजलीघरों के साथ निजी बिजलीघरों में भी लगभग 1000 मेगावाट की थर्मल बैकिंग (क्षमता से कम उत्पादन) चल रही है। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र ने बताया कि होली पर गांवों और शहरों को कटौतीमुक्त आपूर्ति करने का निर्णय किया गया है।
इस बार होली पर अतिरिक्त बिजली नहीं खरीदी जाएगी। जिन बिजलीघरों में थर्मल बैकिंग चल रही है वहां पूरी क्षमता से इकाइयों को चलाकर बिजली की व्यवस्था की जाएगी।
मिश्र ने बताया कि त्योहार के मद्देनजर सभी विद्युत वितरण निगमों और फील्ड के अधिकारियों को आपूर्ति व्यवस्था पर खास निगाह रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय गड़बड़ियों को तत्काल ठीक कराकर आपूर्ति सामान्य रखने को कहा है। खास तौर पर 6 मार्च को दोपहर बाद सतत आपूर्ति के निर्देश दिए हैं जिससे जलापूर्ति में बाधा न हो।
खुलेगी बिजली चोरी की पोल
नियामक आयोग द्वारा मांगी गई लाइन लॉस पर सर्किलवाइज जानकारी को बिजली कंपनियां नहीं दे रही हैं। अब आयोग के अध्यक्ष देश दीपक वर्मा ने कंपनियों को फटकार लगाते हुए केवल सात दिन में सूचना उपलब्ध कराने को कहा है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि सर्किलवाइज लाइन लॉस का कॉर्पोरेशन इसलिए जवाब नहीं दे रहा क्योंकि इससे वीवीआईपी जिलों की बिजली चोरी की पोल खुल जाएगी।
बिजली दरों में कमी के मामले में राज्य योजना आयोग को पहले ही गुमराह करने में लगा पावर कॉर्पोरेशन अब नियामक आयोग को भी सूचना नहीं दे रहा है। खुद नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों से बिजली दर प्रस्ताव पर सैकड़ों कमियां निकाली हैं। इस के जबाव में बिजली कंपनियों द्वारा नौ फरवरी को आधी-अधूरी सूचना आयोग को भेजी गई थी।
जनता पर नहीं बढ़ेगा बोझ
नियामक आयोग के अध्यक्ष ने सख्त कदम उठाया। इसके बाद सचिव अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बिजली कंपनियों को पत्र भेजकर फिर से सवाल किए हैं। इन सवालों के जबाव के लिए सात दिन का समय दिया गया है। इधर उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि आयोग को बिजली कंपनियों के विद्युत दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव को खारिज करते हुए बिजली दरों में कमी के प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए।
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि बिजली कंपनियों द्वारा मनगढ़ंत आंकड़ों के आधार पर पहले बिजली दरों में बढ़ोतरी प्रस्तावित की जाती है, पर सवाल-जवाब होता है तो उसके पास कोई जबाव नहीं होता। इससे यह तय है कि कंपनियां केवल अपनी नाकामी का खामियाजा प्रदेश के उपभोक्ताओं पर डालना चाहती है। लाइन लॉस का सर्किलवाइज आंकड़ा पता चल जाए तो वीवीआईपी जिलों की हकीकत सामने आ जाएगी।