राजधानी के घरेलू बिजली के जो उपभोक्ता महीने में औसतन 200 से 500 यूनिट बिजली का उपभोग करते हैं, उन्हें अब हर महीने बिजली बिल में पहले से 52 से 130 रुपये अधिक चुकाने होंगे।
यानी अक्तूबर में बिजली उपभोग के मद में नवंबर जो बिल चुकाना पड़ेगा, वह पहले से अधिक रकम का होगा। लेकिन एक महीने में 500 यूनिट से एक भी यूनिट (501 यूनिट) अधिक बिजली जलाने पर पहले से करीब 20 फीसदी अधिक बिल चुकाना पड़ेगा।
इस तरह बिजली के नए रेट से जहां उपभोक्ताओं की जेब कटेगी तो लेसा को हर माह सिर्फ 4.42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं से करीब 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी।
पावर कॉर्पोरेशन 12 अक्तूबर से बिजली के नए रेट लागू करने की तैयारी में है। उपभोक्ता इस तारीख से जो बिजली जलाएंगे, उसका बिल नए रेट से बनेगा।
अब करनी पड़ेगी कंजूसी
घरेलू बिजली महंगी किए जाने पर परिवहन विभाग के रिटायर्ड अफसर जेएन तिवारी ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग ने पहले तो यूनिट का स्लैब घटाया और फिर कुल बिल पर रेग्युलेटरी सरचार्ज लगा दिया।
उन्होंने कहा कि बिजली महंगी होने से पेंशन से आम खर्च चलाना पहले से ही मुश्किल था, अब बिजली जलाने में भी कंजूसी करनी पड़ेगी।
कारोबारी सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि दुकान का एक-एक महीने का बिजली बिल 1500 से 2000 रुपये चुकाना पड़ता है। कोई बिल बकाया नहीं है। बिजली के नए रेट से 200 से 300 रुपये बिल फिर बढ़ जाएगा।
इसकी भरपाई के लिए खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ाकर उसकी वसूली ग्राहकों से करेंगे, जिससे महंगाई को बढ़ावा मिलेगा।
नवंबर की दरें होंगी अलग
एलबी श्रीवास्तव ने एक किलोवॉट के लोड पर सिंतबर में 501 यूनिट का बिजली बिल 2408 चुकाया है। लेकिन नवंबर में इतनी यूनिट का बिल उन्हे करीब 3081 रुपए चुकाना होगा।
ये बिल करीब 673 से भी ज्यादा होगा। वहीं सीताराम वर्मा के घर का विद्युत लोड एक किलोवाट है। यह बिजली का उपभोग लाइट, पंखा और एसी चलाने में इस्तेमाल करते हैं।
सीताराम ने अगस्त में 400 यूनिट का बिल सिंतबर में बिल 1913 रुपए चुकाया, लेकिन इनको नवंबर में 400 यूनिट का बिल चुकाने पर 2041 रुपए देने होंगे।