उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं। हालत यह है कि रात में कटौती होने से लोगों की नींद उड़ी हुई है। विभाग का दावा है कि सिर्फ 40 उपकेंद्र ओवरलोड पाए गए हैं। इन उपकेंद्रों का भार आसपास के उपकेंद्रों से बांटने के निर्देश दिए गए हैं।
पावर कॉर्पोरेशन के मुताबिक प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 4,634 उपकेंद्रों में अतिरिक्त भार वाले 40 उपकेंद्रों पर ज्यादा फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं। इन केंद्रों से भार को आसपास के उपकेंद्रों में बांटकर आपूर्ति सामान्य रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्थायी समाधान के लिए बिजनेस प्लान में इन सभी स्टेशनों पर कार्य कराया जा रहा है। कुछ स्थानों पर स्थानीय फॉल्ट के कारण उपभोक्ताओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सभी प्रबंध निदेशकों को हर दिन बिजली आपूर्ति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
इस तरह बढ़ रही है मांग
26 मई 29,058 मेगावाट
27 मई 29,167 मेगावाट
28 मई 29,212 मेगावाट
सिस्टम अपग्रेड करने के बाद ही बढ़ाएं भार : वर्मा
राज्य उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि विद्युत वितरण निगमों की ओर से उपभोक्ताओं को उनकी मांग के अनुसार बिजली नहीं दी जा रही है। जबकि राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार नियम विरुद्ध भार बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भार बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित इलाके का विद्युत सिस्टम बढ़े हुए भार के अनुरूप है या नहीं।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मार्च 2024 तक प्रदेश में कुल 3.45 करोड़ उपभोक्ताओं का विद्युत भार 7.38 करोड़ किलोवाट है। प्रदेश में 132 केवी सब स्टेशनों की क्षमता महज 5.86 करोड़ किलोवाट है। ऐसे में हो रहे स्थानीय फॉल्ट का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं द्वारा लिए गए भार और विद्युत वितरण निगमों के सिस्टम के भार में करीब दो करोड़ किलोवाट का अंतर है।