कोयले की कमी के कारण एनटीपीसी के सिंगरौली और दादरी बिजलीघर की इकाइयां बंद होने के बाद बीती रात ओबरा और हरदुआगंज की भी एक-एक इकाई ठप हो गई। इससे प्रदेश में बिजली संकट और बढ़ गया है।
केंद्र से निर्धारित कोटे की 1700 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। एनर्जी एक्सचेंज से रोजाना 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली खरीदने के बावजूद पावर कॉर्पोरेशन शिड्यूल के मुताबिक आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। उद्योगों समेत पूरे प्रदेश में अतिरिक्त आपात कटौती का सिलसिला जारी है।
बिजली व्यवस्था पटरी पर रखने के लिए कॉर्पोरेशन 1000 मेगावाट खरीदने की कोशिश में जुटा है। शुक्रवार को इसके लिए टेंडर खोले जाएंगे। कंपनियां यूपी को बिजली देने के लिए आगे आएंगी भी या नहीं, इसे लेकर दुविधा बनी हुई है।
इस बीच मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बृहस्पतिवार को पावर कॉर्पोरेशन के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की और संकट दूर करने के लिए हर संभव उपाय करने के निर्देश दिए।
इसलिए भी कार्पोरेशन है दबाव में
सिंगरौली, दादरी व टांडा की इकाइयां बंद होने से लगे झटके से अभियंता उबर भी नहीं पाए थे कि ओबरा और हरदुआगंज बिजलीघर की भी एक-एक इकाई जवाब दे गई।
प्रदेश के ताप बिजलीघरों का उत्पादन घटकर 2300 मेगावाट के आसपास रह गया है जबकि केंद्र से भी निर्धारित कोटे से लगभग 1700 मेगावाट कम बिजली मिल पा रही है। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
एसी का लोड कम न होने तथा ग्रामीण इलाकों में कृषि के लिए बिजली की मांग बरकरार रहने से भी कॉर्पोरेशन पर दबाव बना हुआ है। कई विधायक अपने-अपने इलाकों में बिजली आपूर्ति बढ़वाने के लिए शक्ति भवन में डटे रहे।
अभियंताओं के अनुसार प्रदेश में बिजली की मांग 12,500 मेगावाट के आसपास बनी हुई है जबकि उपलब्धता बमुश्किल 10,000-10,500 मेगावाट ही है। केवल गांवों में ही सिंचाई के लिए करीब 2500 मेगावाट बिजली की दरकार है।
एक दिन में खरीदी गई 11 करोड़ की बिजली
एनर्जी एक्सचेंज से गुरुवार को 11 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी गई इसके बावजूद कमी बनी रही। शुक्रवार के लिए एक्सचेंज से 13 करोड़ रुपये की 24 मिलियन यूनिट बिजली मिली है लेकिन मांग को देखते हुए बहुत ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है।
गांवों को बमुश्किल पांच घंटे बिजली मिल पा रही है जबकि शहरी क्षेत्रों में भी छह से दस घंटे की आपात कटौती हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि मांग में बेतहाशा वृद्धि से हालात नहीं संभल पा रहे हैं। पिछले साल अक्तूबर में बिजली की औसत मांग 198 मिलियन यूनिट थी जो इस वर्ष 266 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है।
बिजली संकट पर पावर कार्पोरेशन के एमडी एपी मिश्र का कहना है कि बिजली की कमी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शुक्रवार को 700 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए टेंडर खुलने हैं। अगर इससे ज्यादा के ऑफर आते हैं तो 1000 मेगावाट तक बिजली खरीदने का फैसला किया जा सकता है। अगर यह बिजली मिल जाती है तो अगले तीन-चार दिन में स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है।